Alternative Investment Fund (AIF) का रियल एस्टेट में निवेश मार्च के **₹1.29 ट्रिलियन** से गिरकर जून 2026 में **₹87,969 करोड़** पर आ गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह गिरावट बाजार से निकासी नहीं, बल्कि SEBI के डेटा रीक्लासिफिकेशन का नतीजा है।
डेटा में बदलाव या बाजार से एग्जिट?
जून 2026 तिमाही के दौरान रियल एस्टेट सेक्टर में AIFs का निवेश अचानक कम होता दिखा है। यह आंकड़ा मार्च 2026 के ₹1.29 ट्रिलियन से गिरकर ₹87,969 करोड़ रह गया है, जो 32% की बड़ी गिरावट है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसे बाजार से पैसा निकलने के संकेत के रूप में देखना गलत होगा।
रीक्लासिफिकेशन का असर
इस गिरावट की मुख्य वजह SEBI के डेटा रिपोर्टिंग में बदलाव को माना जा रहा है। एसेट्स को एक कैटेगरी से दूसरी कैटेगरी में ट्रांसफर किए जाने के कारण कुल आंकड़ों में अंतर दिख रहा है। 'अदर्स' (Others) कैटेगरी में दिखी हलचल से साफ है कि पूंजी बाजार से बाहर नहीं गई है, बल्कि सिर्फ डेटा बुक्स में शिफ्ट हुई है। अगर हम दिसंबर 2025 के आंकड़ों से तुलना करें, तो निवेश का स्तर अब भी 17% अधिक है, जो संस्थागत निवेशकों के भरोसे को दिखाता है।
सेक्टर का आउटलुक
रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्रियल वेयरहाउसिंग और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स में डिमांड अभी भी मजबूत बनी हुई है। फंड मैनेजर्स अब पहले के मुकाबले अधिक फोकस्ड तरीके से निवेश कर रहे हैं, जैसे कि अर्ली-स्टेज प्रोजेक्ट अप्रूवल और अर्बन रीडेवलपमेंट। जैसे-जैसे डेटा रिपोर्टिंग का शोर थमेगा, बाजार का फोकस वापस रियल एस्टेट की अंडरलाइंग डिमांड पर आ जाएगा।
