All India Bank Officers’ Association (AIBOA) ने IDBI Bank के स्टेक सेल का कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि सरकार द्वारा तय ₹81 प्रति शेयर का भाव बैंक की असल कीमत से काफी कम है, जिससे माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स को बड़ा नुकसान हो सकता है।
वैल्यूएशन पर क्यों मचा है बवाल?
IDBI Bank के निजीकरण की प्रक्रिया में अब नया पेंच फंस गया है। AIBOA का तर्क है कि बैंक के पास मौजूद विशाल रियल एस्टेट संपत्तियों की सही कीमत नहीं आंकी गई है। बैंक की किताबों में फिक्स्ड एसेट्स की वैल्यू ₹8,880 करोड़ के आसपास दर्ज है, जबकि एसोसिएशन का दावा है कि 2,000 से ज्यादा संपत्तियों की वास्तविक मार्केट वैल्यू ₹30,000 करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है। मिसाल के तौर पर, हैदराबाद में मौजूद 50 एकड़ के प्लॉट की कीमत ही ₹13,450 करोड़ तक हो सकती है।
मुनाफे के बावजूद सस्ता भाव?
बैंक का फाइनेंशियल प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है और फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कंपनी ने ₹9,513 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इन मजबूत आंकड़ों को देखते हुए यूनियन का मानना है कि शेयर की कीमत कम से कम ₹133 होनी चाहिए, न कि सरकार द्वारा प्रस्तावित ₹81। फिलहाल सरकार और LIC के पास बैंक की 94.71% हिस्सेदारी है और वे 60.72% स्टेक बेचने की तैयारी में हैं।
रेगुलेटरी चुनौतियां और आगे की राह
इस डील के सामने केवल वैल्यूएशन ही नहीं, बल्कि रेगुलेटरी मुश्किलें भी हैं। खबरों के मुताबिक, Fairfax Financial Holdings इस रेस में सबसे आगे है, लेकिन RBI के नियमों के मुताबिक, अगर वे बैंक खरीदते हैं तो यह CSB Bank के मालिकाना हक के साथ हितों का टकराव (Conflict of interest) पैदा कर सकता है। हालांकि, 2 साल के अनुपालन की राहत की बात चल रही है, लेकिन निवेशकों के लिए यह स्थिति अनिश्चितता पैदा कर रही है। अब सबकी नजरें DIPAM पर हैं कि क्या वे प्रॉपर्टी ऑडिट की डिटेल सार्वजनिक करेंगे या नहीं।
