लाहौर की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने एक बड़े फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह AI का इस्तेमाल करके फर्जी पहचान बनाता था और Canadian बैंकों के KYC प्रोटोकॉल को चकमा देकर क्रेडिट लाइन खाली कर देता था।
क्या था फ्रॉड का तरीका?
पाकिस्तान की नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NCCIA) ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से कनाडा के बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को निशाना बना रहा था। इस मामले में लाहौर से 3 संदिग्धों—सुभान बट, गुलरेज बट और मोहम्मद नोमान—को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 4 अन्य सहयोगियों की तलाश कनाडा में जारी है।
कैसे चकमा देते थे सुरक्षा?
गिरोह ने 'सिंथेटिक आइडेंटिटी फ्रॉड' का सहारा लिया। इसमें असली लोगों के डेटा को AI-जनरेटेड जानकारी के साथ मिलाकर फर्जी डिजिटल प्रोफाइल बनाई जाती थी। ये जालसाज 'Dolphin Anty' जैसे एंटी-डिटेक्ट ब्राउजर्स का इस्तेमाल करते थे ताकि उनकी डिजिटल पहचान छुपी रहे और बैंक उन्हें पकड़ न सकें। एक बार बैंक अकाउंट खुल जाने के बाद, ये लोग क्रेडिट कार्ड के जरिए लिमिट को पूरी तरह खत्म (Max out) कर देते थे और बाद में अकाउंट छोड़कर गायब हो जाते थे, जिससे बैंकों को भारी बैड डेट (Bad debt) का सामना करना पड़ता था।
डिजिटल बैंकिंग के लिए चेतावनी
यह घटना दिखाती है कि कैसे रिमोट बैंकिंग की दुनिया में पुराने सिक्योरिटी सिस्टम अब कमजोर पड़ रहे हैं। आज AI से तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज असली पहचान पत्रों को इतनी सटीकता से कॉपी कर रहे हैं कि पहचान करना मुश्किल हो गया है।
अब फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर दबाव बढ़ गया है कि वे अपने सिस्टम में एडवांस्ड बायोमेट्रिक्स और बिहेवियरल एनालिसिस टूल्स को शामिल करें ताकि फ्रॉड की कोशिशों को समय रहते पकड़ा जा सके।
