यह एआई (AI) और जेन-एआई (GenAI) का स्ट्रैटेजिक इस्तेमाल सिर्फ एफिशिएंसी बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एनबीएफसी (NBFC) कंपनियों के ऑपरेशनल मॉडल में एक बड़ा बदलाव ला रहा है। Bajaj Finance, L&T Finance, और Tata Capital जैसी कंपनियां अब अपने कोर बिजनेस में AI को गहराई से इंटीग्रेट कर रही हैं। इसका मकसद सिर्फ लागत कम करना नहीं, बल्कि तेज़ी से बदलते बाजार में अपनी कॉम्पिटिटिव पोजिशन को मजबूत करना और नए रेवेन्यू स्ट्रीम्स खोलना है। भारी निवेश यह दर्शाता है कि AI भविष्य में मार्केट शेयर और कंपनियों के सर्वाइवल के लिए एक क्रिटिकल फैक्टर बनने जा रहा है। इससे टेक्नो-एडवांस्ड संस्थानों और पिछड़े हुए संस्थानों के बीच एक बड़ी खाई पैदा हो सकती है।
ऑपरेशन्स में AI के ठोस फायदे
मार्केट लीडर Bajaj Finance, जिसका मार्केट कैपिटलाइज़ेशन लगभग ₹6.30 लाख करोड़ और पी/ई रेश्यो करीब 34.6 है, AI का इस्तेमाल कस्टमर इंटरेक्शन्स को एनालाइज करने के लिए कर रही है। कंपनी ने 20 मिलियन (2 करोड़) कॉल्स को एनालाइज किया, जिन्हें 500,000 (5 लाख) से ज़्यादा ग्राहकों के लिए टेक्स्ट में बदला गया। इससे 100,000 (1 लाख) नए ऑफर्स जेनरेट हुए और पहले एक्सेसिबल डेटा मिला। इस AI-ड्रिवन इनसाइट से कंपनी के AI कॉल सेंटर के ज़रिए लगभग ₹1,600 करोड़ के लोन डिस्बर्स हुए हैं। अकेले कॉल डेटा एनालिसिस से ₹325 करोड़ का वॉल्यूम बढ़ा है। कंपनी का लक्ष्य इसे सालाना 100 मिलियन (10 करोड़) कॉल्स तक स्केल करना है, साथ ही 2026 के मध्य तक सभी 26 प्रोडक्ट्स में कन्वर्सेशनल बॉट्स को इंटीग्रेट करना और 2027 के फाइनेंशियल ईयर में 800 से ज़्यादा ऑटोनोमस एजेंट्स को डिप्लॉय करना है।
L&T Finance, जिसका वैल्यूएशन करीब ₹74,519 करोड़ और पी/ई 26.25 है, प्रोजेक्ट नोस्ट्रैडैम (Project Nostradamus) और प्रोजेक्ट हेलिओस (Project Helios) जैसे AI इनिशिएटिव्स का इस्तेमाल कर रही है। प्रोजेक्ट हेलिओस, जो एक एजेंटिक AI प्लेटफॉर्म है, ने 5,000 से ज़्यादा अंडरराइटिंग केसेस को प्रोसेस किया है। इससे SME सेगमेंट में टर्नअराउंड टाइम 30% कम हुआ है और प्रति केस 1.5 घंटे की बचत हुई है। नोस्ट्रैडैम को 2027 के फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत तक कई बिजनेस वर्टिकल्स में लागू करने का लक्ष्य है। वहीं, Tata Capital, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹1.51 लाख करोड़ और पी/ई रेश्यो करीब 34.06 है, AI अंडरराइटिंग को-पायलट्स और AI-जेनरेटेड क्रेडिट मेमोज़ को इंटीग्रेट कर रही है, जिसका उद्देश्य ऑपरेशन्स में स्पीड, कंसिस्टेंसी और रिस्क गवर्नेंस को बेहतर बनाना है।
बढ़ता टेक्नोलॉजी का गैप
हालांकि ये बड़ी एनबीएफसी AI को आक्रामक तरीके से अपना रही हैं, लेकिन भारतीय फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में AI एडॉप्शन की दर मिली-जुली है। केवल लगभग 21% फाइनेंशियल संस्थानों ने अपने कोर ऑपरेशन्स के लिए AI इम्प्लीमेंटेशन शुरू किया है, और यह एडॉप्शन बड़े संस्थानों में ही ज़्यादा केंद्रित है। छोटे अर्बन कोऑपरेटिव बैंक और कई एनबीएफसी के सामने बड़ी चुनौतियां हैं, जैसे अपर्याप्त डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल्ड टैलेंट की कमी और सीमित आईटी बजट। यह असमानता उन लोगों के लिए एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज पैदा कर रही है जिनके पास निवेश के संसाधन हैं। AI रियल-टाइम में कई डेटा पॉइंट्स को प्रोसेस करके लोन अप्रूवल के समय को दिनों से मिनटों में बदल देता है।
जोखिम और छिपी हुई देनदारियां
AI पर बढ़ती निर्भरता के बावजूद, इसमें नए रिस्क भी शामिल हैं। अल्गोरिथम बायस (algorithmic bias) और फेयरनेस (fairness) जैसी चिंताएं गंभीर हैं, जिनके लिए मजबूत गवर्नेंस और लगातार निगरानी की ज़रूरत है। AI एडॉप्शन का बड़े खिलाड़ियों में केंद्रित होना भी एक सिस्टमैटिक रिस्क पैदा करता है, जिससे मार्केट कंसॉलिडेशन और छोटे संस्थानों का बाहर होना हो सकता है जो टेक्नोलॉजिकल निवेश की गति को बनाए नहीं रख सकते। इसके अलावा, AI सिस्टम की जटिलता डेटा प्राइवेसी और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में नई कमजोरियां पैदा कर सकती है, जिसके लिए सोफिस्टिकेटेड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की ज़रूरत है। Bajaj Finance जैसी कंपनियां मज़बूत ग्रोथ दर्ज कर रही हैं, लेकिन नियामक वातावरण के सख्त होने या डेटा इंटीग्रिटी से समझौता किए बिना AI क्षमताओं को स्केल करने में आने वाली अनपेक्षित चुनौतियों से संभावित हेडविंड्स (headwinds) उभर सकते हैं। AI क्षमताओं के तेज़ विस्तार को एथिकल AI डिप्लॉयमेंट और रेसिलिएंट ऑपरेशनल फ्रेमवर्क की ज़रूरत के साथ संतुलित किया जाना चाहिए।
भविष्य की राह
AI का यह निरंतर इंटीग्रेशन एनबीएफसी सेक्टर में कॉम्पिटिटिव डायनामिक्स को फिर से परिभाषित करेगा। जैसे-जैसे Bajaj Finance, L&T Finance, और Tata Capital जैसी कंपनियां AI-ड्रिवन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाती रहेंगी, उनकी पर्सनलाइज्ड प्रोडक्ट्स पेश करने, रिस्क को डायनामिक रूप से मैनेज करने और बेहतर एफिशिएंसी के साथ ऑपरेट करने की क्षमता नए इंडस्ट्री बेंचमार्क तय करेगी। Bajaj Finance के लिए एनालिस्ट कंसेंसस (analyst consensus) काफी हद तक पॉजिटिव बना हुआ है, जिसमें ज़्यादातर एनालिस्ट्स 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं और 12 महीने के औसत प्राइस टारगेट में संभावित अपसाइड का संकेत दे रहे हैं। यह निवेशक का विश्वास दिखाता है कि AI एडॉप्शन सस्टेन्ड ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के लिए स्ट्रेटेजिक वैल्यू रखता है।