$11.4 अरब के क्रिप्टो स्कैम: FBI ने जारी की चौंकाने वाली रिपोर्ट
यह चौंकाने वाला आंकड़ा FBI के इंटरनेट क्राइम कंप्लेंट सेंटर (IC3) की रिपोर्ट में सामने आया है। 2025 में अमेरिकियों ने क्रिप्टो स्कैम में करीब $11.4 बिलियन (लगभग ₹95,000 करोड़) गंवाए, जो पिछले साल की तुलना में 22% की भारी बढ़ोतरी है। इस दौरान 1,81,565 से ज़्यादा क्रिप्टो से जुड़ी शिकायतें दर्ज हुईं, जो कि 21% ज़्यादा हैं। हर पीड़ित को औसतन $62,604 का भारी नुकसान हुआ, जबकि लगभग 18,600 लोगों ने $1,00,000 से अधिक की रकम गंवाई। ये स्कैम अब साइबर अपराधों से होने वाले कुल $20.8 अरब के नुकसान का आधे से ज़्यादा हिस्सा बन चुके हैं।
AI और ग्लोबल क्राइम सिंडिकेट्स: धोखेबाजी का नया चेहरा
धोखेबाज़ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं। डीपफेक वीडियो, आवाज की नकल (voice cloning) और इंसानों की तरह लगने वाले चैटबॉट (chatbots) के ज़रिए वे भरोसेमंद लोगों का रूप धारण कर रहे हैं और फिशिंग (phishing) जैसी चालें चल रहे हैं। इससे असली और नकली प्लेटफॉर्म में फर्क करना मुश्किल हो गया है। ये हाई-टेक तरीके 'पिग बुचरिंग' (pig butchering) जैसे पुराने स्कैम को और भी ज़्यादा खतरनाक बना रहे हैं, जिसमें सोशल इंजीनियरिंग और नकली इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाया जाता है। ये ऑपरेशन बड़े पैमाने पर दक्षिण पूर्व एशिया (Southeast Asia) स्थित संगठित अपराध समूहों द्वारा चलाए जा रहे हैं, जो स्कैम कंपाउंड्स का इस्तेमाल करते हैं और मानव तस्करी के पीड़ितों का भी शोषण करते हैं।
इन्वेस्टमेंट स्कैम सबसे खतरनाक, बुजुर्ग निशाने पर
क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर में इन्वेस्टमेंट स्कैम सबसे ज़्यादा नुकसानदायक साबित हुए हैं। 2025 में अकेले इन स्कैम से कुल क्रिप्टो स्कैम के नुकसान का लगभग $7.2 अरब रहा, जो पिछले साल से 25% ज़्यादा है। स्कैमर अक्सर सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स या विज्ञापनों के ज़रिए पीड़ितों से संपर्क करते हैं, भरोसा बनाते हैं और फिर उन्हें नकली इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म पर ले जाते हैं जहाँ झूठे मुनाफे दिखाए जाते हैं। क्रिप्टो ATM फ्रॉड में भी 58% का इजाफा देखा गया है। खास तौर पर 60 साल और उससे ज़्यादा उम्र के बुजुर्गों को ज़्यादा निशाना बनाया जा रहा है। इस समूह ने 2025 में कुल साइबर अपराध के नुकसान का करीब $7.7 अरब रिपोर्ट किया, जिसका एक बड़ा हिस्सा क्रिप्टो स्कैम से जुड़ा था। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 60 साल से ज़्यादा उम्र के पीड़ितों ने 2025 में क्रिप्टो फ्रॉड से हुए कुल नुकसान का लगभग 40% हिस्सा गंवाया, यानी $4.43 अरब। उनकी जमा-पूंजी और डिजिटल एसेट्स की अपरिवर्तनीय प्रकृति (irreversibility) से संभावित अपरिचयता उन्हें आसान निशाना बनाती है।
पैसे की रिकवरी मुश्किल, रिपोर्टिंग में भी कमी
क्रिप्टो फ्रॉड की असली सीमा शायद इससे कहीं ज़्यादा है, क्योंकि कई पीड़ित अपनी कहानियों को अधिकारियों को रिपोर्ट ही नहीं करते। क्रिप्टोकरेंसी की छद्म-गुमनाम प्रकृति (pseudonymous nature) और अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ग्लोबल, अपारदर्शी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क के कारण चोरी हुए फंड की रिकवरी बेहद मुश्किल है। स्कैम कंपाउंड्स के भीतर मानव तस्करी पीड़ितों का शोषण एक गंभीर मानवीय संकट है। इसके अलावा, ब्लॉकचेन की गोपनीयता (privacy features) AI की बढ़ती क्षमताओं के सामने कमज़ोर पड़ रही है, जिससे स्कैमरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले उन्नत मशीन लर्निंग मॉडल के खिलाफ छिपना (obfuscation) और भी कठिन हो गया है।
ग्लोबल एफर्ट्स: टेक वॉर में निरंतर लड़ाई
कानून प्रवर्तन एजेंसियां इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए अपने प्रयासों को तेज़ कर रही हैं। FBI के 'ऑपरेशन लेवल अप' (Operation Level Up), जो 2024 में शुरू हुआ था, पहले ही हज़ारों पीड़ितों की मदद कर चुका है और करोड़ों डॉलर के नुकसान को कम किया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कार्रवाई हो रही है, जैसे कि यूके द्वारा दक्षिण पूर्व एशियाई स्कैम नेटवर्क से जुड़े क्रिप्टो मार्केटप्लेस Xinbi पर लगाए गए प्रतिबंध। यह इन ऑपरेशन्स को खत्म करने के लिए एक समन्वित वैश्विक प्रयास का संकेत देता है। हालांकि, AI का तेज़ी से विकास और आपराधिक सिंडिकेट्स की लगातार अनुकूलन क्षमता (adaptability) यह दर्शाती है कि यह एक निरंतर तकनीकी लड़ाई है जिसके लिए लगातार सतर्कता और नवाचार की आवश्यकता है।