AI कैसे बदल रहा है लोन की दुनिया?
AI भारत के क्रेडिट मार्केट में क्रांति ला रहा है। पहले जो लोन दिनों में अप्रूव होते थे, अब वे मिनटों में मिल रहे हैं। कंपनियां गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) फाइलिंग, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन और डिजिटल एक्टिविटी जैसे रियल-टाइम डेटा का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे सिर्फ पारंपरिक स्कोर पर निर्भर रहने की बजाय, अब माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs), गिग वर्कर्स और नए उधारकर्ताओं के लिए भी क्रेडिट के रास्ते खुल गए हैं। इसका नतीजा यह है कि असुरक्षित लोन, 'बाय नाउ पे लेटर' (BNPL) स्कीम्स और माइक्रो-क्रेडिट में भारी उछाल आया है। AI-संचालित पोर्टफोलियो पारंपरिक तरीकों की तुलना में ग्रोथ और रिटर्न-ऑन-एसेट्स को दोगुना कर सकते हैं।
'ब्लैक बॉक्स' का खतरा: इकोनॉमिक शॉक को कैसे बढ़ा रहा है AI?
इस रफ्तार के पीछे, सिस्टमैटिक रिस्क भी तेजी से बढ़ रहा है। कई AI मॉडल "ब्लैक बॉक्स" की तरह काम करते हैं, यानी उनके फैसले कैसे लिए जाते हैं, यह समझना मुश्किल है। उनके ट्रेनिंग डेटा में बायस (bias) होने से जोखिम का गलत अनुमान लग सकता है और वे आर्थिक बदलावों पर बहुत तेजी से प्रतिक्रिया कर सकते हैं। ऐसे में, अगर मंदी (downturn) आती है, तो ये मॉडल अचानक क्रेडिट देना बंद कर सकते हैं, जिससे वित्तीय अस्थिरता (financial instability) का खतरा पैदा हो सकता है। Economic Survey 2025-26 चेताता है कि AI का नौकरियों पर असर बैंकों को 2008 के संकट से भी ज्यादा प्रभावित कर सकता है। भारत के बड़े IT/BPO सेक्टर में AI से ऑटोमेशन का खतरा है, जिससे रिटेल और कॉर्पोरेट पोर्टफोलियो में बैड लोन (NPAs) बढ़ सकते हैं।
नई कमजोरियां और वैश्विक निगरानी
क्रेडिट फैसलों में AI का एकीकरण नई कमजोरियां पैदा कर रहा है। फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) जैसे ग्लोबल रेगुलेटर्स ने थर्ड-पार्टी पर निर्भरता, मार्केट लिंक्स का बढ़ना, साइबर खतरे और खासकर AI मॉडल व डेटा मैनेजमेंट से जुड़ी समस्याओं के जोखिमों पर प्रकाश डाला है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इन चिंताओं से अवगत है। अगस्त 2025 में, RBI ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए "Responsible and Ethical Enablement" (FREE-AI Report) पर एक फ्रेमवर्क जारी किया, जिसमें सावधानीपूर्वक अपनाने और ह्यूमन चेक के साथ हाइब्रिड मॉडल की सलाह दी गई है। AI पैटर्न खोजने में तो माहिर है, लेकिन यह असामान्य इकोनॉमी में डिफॉल्ट के सूक्ष्म संकेतों को चूक सकता है या मार्केट में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकता है।
वैल्यूएशन और भविष्य की चाल
28 अप्रैल 2026 तक, भारत के टॉप बैंकों को ट्रैक करने वाले Nifty Bank इंडेक्स का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेश्यो 14.09 और 14.81 के बीच है। Nifty Bank कंपनियों का कुल मार्केट वैल्यूएशन लगभग ₹47.7 ट्रिलियन है। AI से एफिशिएंसी बढ़ने और कॉस्ट कटिंग होने की उम्मीद है, जिसमें जनरेटिव AI बैंक की एफिशिएंसी को 46% तक बढ़ा सकता है। हालांकि, नौकरी का विस्थापन और बेहतर साइबर सुरक्षा की जरूरत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, अगले दशक में नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs) बैंकों की तुलना में तेजी से बढ़ सकती हैं, जिनकी कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 17% रहने की उम्मीद है, जबकि बैंकों का CAGR 12% रह सकता है। यह फुर्ती NBFCs की AI को नए लोन टाइप के लिए तेजी से अपनाने की क्षमता का भी नतीजा है। FICCI-IBA बैंकर सर्वे 2026 में भारत के बैंकिंग सेक्टर के लिए AI को क्रेडिट, अंडरराइटिंग और कलेक्शन में सबसे बड़ा डिसरप्टर (disruptor) बताता है, जो बड़े बदलाव और जोखिम वाले भविष्य की ओर इशारा करता है।
