Asian Development Bank (ADB) ने Maharashtra State Electricity Distribution Company (MSEDCL) के प्रोजेक्ट्स को 'less than likely' यानी टिकाऊ न रहने की श्रेणी में रखा है। कंपनी के बढ़ते नुकसान और गिरती वित्तीय सेहत ने बिजली क्षेत्र की स्थिरता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) की हालिया असेसमेंट ने महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (MSEDCL) के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मल्टीलेटरल लेंडर ने कंपनी के लोन-फंडेड प्रोग्राम्स की सस्टेनेबिलिटी को 'लेस देन लाइकली' करार दिया है, जिसकी मुख्य वजह कंपनी की खराब होती आर्थिक स्थिति है।
खराब प्रदर्शन और वित्तीय तंगी
रिपोर्ट के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2024 में MSEDCL देश की 52 बिजली वितरण कंपनियों में सबसे निचले पायदान पर रही। कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती एग्रीगेट टेक्निकल और कमर्शियल लॉस में हुई भारी बढ़ोतरी है, जो 2022 में 15.4% से बढ़कर 2024 में 24.4% तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा सीधे तौर पर कंपनी की कमजोर रेवेन्यू कलेक्शन और ऑपरेशनल डिसिप्लिन को दर्शाता है।
कंपनी के कर्ज चुकाने की क्षमता यानी डेट सर्विस कवरेज रेशियो में भी बड़ी गिरावट आई है। यह रेशियो 1.13 रहने का अनुमान था, लेकिन 2024 में यह गिरकर महज 0.07 रह गया है, जो कंपनी की वित्तीय बदहाली को बयां करता है।
रेगुलेटरी और गवर्नेंस की दिक्कतें
वित्तीय मोर्चे के अलावा, कंपनी रेगुलेटरी बॉडीज के साथ विवादों में भी उलझी है। अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी ने MSEDCL की अपीलों की सुनवाई फिलहाल रोक दी है। विवाद की वजह रेगुलेटर के खिलाफ मीडिया में आई कुछ कथित अपमानजनक टिप्पणियां हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रिब्यूनल ने MSEDCL के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही, बोरी टाइगर रिजर्व में सबस्टेशन के निर्माण जैसे मुद्दों पर एनवायरमेंटल और सोशल गवर्नेंस की अनदेखी भी रिपोर्ट में उजागर हुई है। कंपनी के पास संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए आए $2.5 मिलियन की राशि खर्च ही नहीं हुई, जो कंपनी के इंटरनल ओवरसाइट और गवर्नेंस पर बड़े सवाल खड़े करती है।
