ED की कार्रवाई का बड़ा दायरा
एन्फोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने एक बार फिर अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप (ADAG) पर शिकंजा कस दिया है। 6 मार्च 2026 को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से संबंधित ₹581 करोड़ से अधिक की नई संपत्तियों को जब्त किया गया है। यह कुर्की देश के 12 राज्यों में फैली हुई है। यह कार्रवाई पिछले कुछ समय से ग्रुप पर चल रही ज़ोरदार एक्शन का हिस्सा है, जिसके तहत ED की कुल ज़ब्ती अब ₹16,310 करोड़ तक पहुँच गई है। यह जांच जुलाई 2025 में शुरू हुई थी, जिसमें आरोप है कि वित्तीय संस्थानों से जुटाए गए ₹11,000 करोड़ से ज़्यादा की राशि शेल कंपनियों के ज़रिए डायवर्ट की गई और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) बन गई।
CBI का ₹1085 करोड़ का नया फ्रॉड केस
ग्रुप की कानूनी चुनौतियों में एक और कड़ी जुड़ गई है। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने 5 मार्च 2026 को उद्योगपति अनिल अंबानी, रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) और एक पूर्व डायरेक्टर के खिलाफ ₹1,085 करोड़ से ज़्यादा के बैंक फ्रॉड का मामला दर्ज किया है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की शिकायत पर आधारित इस CBI कार्रवाई में 2013 से 2017 के बीच हुई धोखाधड़ी और लोन फंड के दुरुपयोग का आरोप है, जिससे PNB और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को नुकसान हुआ। ED के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि CBI की FIR के आधार पर ED भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत एक पैरलल मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू करेगा। यह बहु-एजेंसी समन्वित प्रयास का संकेत देता है।
शेयर बाजार का हाल और गहरी वित्तीय मुश्किलें
इन बढ़ती नियामक कार्रवाइयों के बावजूद, ADAG की लिस्टेड कंपनियों के शेयर बाजारों में मिली-जुली प्रतिक्रिया दिख रही है। मार्च 2026 की शुरुआत में Reliance Infrastructure Limited (RELINFRA) लगभग ₹89-93 के स्तर पर ट्रेड कर रही थी, जिसकी मार्केट कैप करीब ₹3,700 करोड़ थी। वहीं, Reliance Power Limited (RPOWER) ₹22-24 के रेंज में थी, जिसकी मार्केट कैप लगभग ₹9,281 करोड़ थी। हालांकि, Reliance Communications (RCOM) की वैल्यूएशन लगभग नगण्य है, जो करीब ₹0.97 प्रति शेयर पर कारोबार कर रही है। ग्रुप की वित्तीय हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। Reliance Communications पर ₹1.27 लाख करोड़ से अधिक का भारी भरकम कर्ज़ है। वहीं, Reliance Infrastructure और Reliance Power ने कर्ज कम करने के दावे किए हैं, लेकिन जांच का दायरा बढ़ने से ग्रुप की साख पर गहरा असर पड़ा है।