ADAG फ्रॉड केस: ₹40,000 करोड़ की जांच का SC का आदेश, ED पर कसे शिकंजे!

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AuthorMehul Desai|Published at:
ADAG फ्रॉड केस: ₹40,000 करोड़ की जांच का SC का आदेश, ED पर कसे शिकंजे!
Overview

अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश के बाद, एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ADAG और इससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ **₹40,000 करोड़** के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) गठित कर रहा है। यह कदम नियामक जांच के दायरे को और कड़ा कर रहा है, क्योंकि ED पहले ही **₹12,000 करोड़** की संपत्ति अटैच कर चुका है।

SC का सख्त निर्देश, ED की SIT जांच शुरू

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बाद, अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) और उसकी संबंधित कंपनियों पर ₹40,000 करोड़ के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट फ्रॉड की जांच अब एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यह जांच "निष्पक्ष, स्वतंत्र, त्वरित और विवेकपूर्ण" तरीके से होनी चाहिए। ED पहले से ही अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के खिलाफ जांच कर रहा था, जिसके तहत अब तक ₹12,000 करोड़ की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। यह नई SIT इस जांच को और गहराई देगी, जिससे ADAG ग्रुप की कंपनियों और उनके अधिकारियों द्वारा किए गए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अनियमितताओं का पर्दाफाश होने की उम्मीद है।

शेयर बाजार में गिरावट, निवेशक चिंतित

हालांकि, इस गंभीर आरोप और सुप्रीम कोर्ट की सीधी भागीदारी के बावजूद, बाजार की प्रतिक्रिया मिली-जुली दिख रही है, लेकिन दिग्गज शेयरों पर दबाव साफ है। 6 फरवरी, 2026 को, Reliance Infrastructure Ltd (RELINFRA) के शेयर ₹120.10 पर बंद हुए, जो दिन के कारोबार में 4.72% की बड़ी गिरावट थी। यह शेयर अपने 52-हफ्ते के निचले स्तर ₹114.35 पर भी आ गया। पिछले एक साल में यह शेयर 61.1% तक गिर चुका है, जो इसके सेक्टर और बड़े बाजार सूचकांकों दोनों के मुकाबले काफी कमजोर प्रदर्शन है। इसी तरह, Reliance Power Ltd (RPOWER) के शेयर भी 6 फरवरी, 2026 तक लगभग ₹28.0 के आसपास ट्रेड कर रहे थे। कंपनी का P/E रेश्यो 6 फरवरी, 2026 तक 40.94 था, जो हालिया कमाई के रुझानों से काफी अलग दिखता है। कुछ रिपोर्टों का कहना है कि ADAG ग्रुप के बिजनेस इन जांचों से प्रभावित नहीं हैं, लेकिन Reliance Infrastructure और Reliance Power के शेयरों का लगातार गिरना निवेशकों की गहरी चिंता और सावधानी को दर्शाता है।

वित्तीय संकट गहराया, प्रतिस्पर्धियों से पिछड़ रहे

₹40,000 करोड़ के कथित फ्रॉड और ₹12,000 करोड़ की संपत्ति अटैचमेंट ADAG ग्रुप के लिए एक बड़े वित्तीय संकट का संकेत हैं। अनिल अंबानी खुद पिछले साल ED द्वारा कथित बैंक लोन अनियमितताओं के संबंध में सवालों के घेरे में आ चुके हैं। पूर्व RCOM प्रेसिडेंट Punit Garg की ED द्वारा गिरफ्तारी जांच के तेज होने का एक और सबूत है। ऐतिहासिक रूप से, ADAG कंपनियां बड़ी वित्तीय परेशानियों और कानूनी लड़ाइयों में उलझी रही हैं। उदाहरण के लिए, नवंबर 2025 में, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के तहत Reliance Communications (RCom) और अन्य ग्रुप एंटिटीज से जुड़ी ₹7,500 करोड़ से अधिक की संपत्ति अटैच की थी। RCom और उसकी सहयोगी कंपनियों पर 2017 से 2019 के बीच Yes Bank से लोन डाइवर्ट करने के गंभीर आरोप हैं। Reliance Infrastructure और Reliance Power ने भले ही कहा हो कि इन जांचों का उनके ऑपरेशंस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन उनके शेयरों का लगातार गिरना और निगेटिव मार्केट सेंटीमेंट, जैसे कि Reliance Infrastructure का 'Strong Sell' Mojo Score, कुछ और ही कहानी कहते हैं। कंपनी का डेट-टू-EBITDA रेश्यो 7.32 गुना बना हुआ है, जो गंभीर लीवरेज चुनौतियों को दर्शाता है। Adani Power (जिसकी मार्केट कैप ₹2,94,554.43 करोड़ और P/E 25.72 है) जैसे मजबूत प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, ADAG संस्थाएं वित्तीय कुप्रबंधन और गहरी नियामक समस्याओं के बोझ तले दबी हुई हैं।

भविष्य पर अनिश्चितता का बादल

ADAG ग्रुप के लिए आगे का रास्ता चल रही जांचों और कथित वित्तीय कदाचार के बड़े पैमाने को देखते हुए अत्यधिक अनिश्चित है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश का मतलब है कि एक त्वरित समाधान की उम्मीद कम है, जिससे समूह के लिए अनिश्चितता बनी रहेगी। ED का "वित्तीय अपराधों के अपराधियों का सक्रिय रूप से पीछा करने और अपराध की आय को वसूलने" का संकल्प अवैध धन की वसूली के लिए एक दृढ़ रवैया दिखाता है। यह निरंतर नियामक दबाव, समूह की पिछली वित्तीय कमजोरियों के साथ मिलकर, किसी भी भविष्य के ऑपरेशनल रिकवरी या कैपिटल इन्फ्यूजन प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश करता है। भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में भले ही जबरदस्त निवेश के अवसर हों, लेकिन ये सेक्टर शायद ऐसी कंपनियों को तरजीह देंगे जिनके बैलेंस शीट साफ हों और नियामक स्थिति स्पष्ट हो।

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