बैंकिंग सेक्टर में नई राह
ABSL AMC का यह नया BSE Top 10 Banks ETF लॉन्च करना एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। भारतीय बैंकिंग सेक्टर देश की वित्तीय व्यवस्था का करीब दो-तिहाई हिस्सा है, और हाल के दिनों में इसने अपनी बैलेंस शीट में जबरदस्त मजबूती और लगातार कमाई में ग्रोथ दिखाई है। इस ETF के जरिए टॉप 10 दमदार बैंकों में सीधे निवेश का मौका मिलेगा, जो बैंकिंग सेक्टर की आगे की राह को भुनाने में मददगार हो सकता है।
टॉप 10 बैंकों पर फोकस
यह नया एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) BSE Top 10 Banks Total Return Index को ट्रैक करेगा। इंडेक्स के लिए टॉप बैंकों का चुनाव BSE 500 के दायरे से फ्री-फ्लोट मार्केट कैप के आधार पर किया जाएगा। इसका मकसद 10 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बैंकों पर फोकस करना है, जिनमें सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर के बैंक शामिल होंगे। आपको बता दें कि NIFTY Bank Index ने 2025 में काफी समय तक NIFTY 50 से बेहतर प्रदर्शन किया है। दिसंबर 2025 तक, भारत में क्रेडिट ग्रोथ 14.5% सालाना की रफ्तार से बढ़ी है, जो बैंकिंग सेवाओं की मजबूत मांग को दर्शाता है।
इंडेक्स की बनावट और मार्केट पोजीशन
BSE Top 10 Banks TRI की एक खासियत यह है कि यह नॉन-F&O कंप्लायंट इंडेक्स है। इसका मतलब है कि इस पर डेरिवेटिव्स से जुड़े कैपिंग नियमों का असर नहीं पड़ेगा। इससे स्टॉक-लेवल पर कम उतार-चढ़ाव (dispersion) देखने की उम्मीद है, जिससे चुने गए बैंकों के प्रदर्शन का एक स्थिर नज़रिया मिलेगा। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, इंडेक्स में HDFC Bank की हिस्सेदारी 32.79% और ICICI Bank की 20.8% थी। टॉप तीन कंपनियों का कुल वेटेज 63% पर कैप किया गया था। यह रणनीति Nippon Nifty Bank ETF जैसे व्यापक बैंकिंग ETFs से अलग है, जिनका एक्सपेंस रेश्यो 0.19% है।
सेक्टर की सेहत और कॉम्पिटिशन
भारतीय बैंकिंग सेक्टर ने फंडामेंटल (fundamental) तौर पर काफी सुधार दिखाया है। मार्च 2025 तक ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) घटकर 2.31% के 20 साल के निचले स्तर पर आ गए हैं और इनमें और कमी आने का अनुमान है। बैंकों की कमाई (profitability) में भी सुधार हुआ है। 2025 की शुरुआत में डिपॉजिट रेट्स में कॉम्पिटिशन के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव रहा, लेकिन RBI की ढील वाली मॉनेटरी पॉलिसी (जैसे रेपो रेट में कटौती और CRR में कमी) से फंड की लागत (funding costs) कम होने की उम्मीद है।
कंसन्ट्रेशन के रिस्क
हालांकि, इस ETF के कंसन्ट्रेटेड (concentrated) नेचर में कुछ रिस्क भी हैं। अगर टॉप 10 में से एक या दो बड़े बैंकों में भी गिरावट आती है, तो ETF के परफॉरमेंस पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। ABSL AMC खुद भी अतीत में कुछ जांचों से गुज़री है। हाल ही में, जनवरी 2026 में चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर महेश पाटिल ने इस्तीफा दिया। इसके अलावा, 2024 में ABSL AMC से जुड़े एक ट्रेड को लेकर SEBI ने Bank of America को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। कंपनी पिछले पांच सालों में 9.93% की धीमी सेल्स ग्रोथ से भी जूझ रही है। यह ETF सिर्फ दस संस्थाओं पर निर्भर है, जिससे यह मिड-टियर या स्पेशलाइज्ड फाइनेंशियल संस्थानों की ग्रोथ को मिस कर सकता है।
आगे क्या?
भारतीय बैंकिंग सेक्टर का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है। लोन में बढ़ोतरी और मार्जिन में सुधार के चलते FY27-28 तक कमाई में अच्छी ग्रोथ का अनुमान है। BSE Top 10 Banks ETF निवेशकों के लिए इस ग्रोथ का फायदा उठाने का एक सीधा और किफायती तरीका है, बशर्ते वे कंसन्ट्रेशन रिस्क के साथ सहज हों। जैसे-जैसे सेक्टर परिपक्व हो रहा है, वैसे-वैसे इस तरह के स्पेशलाइज्ड ETFs की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। ₹4.25 लाख करोड़ से अधिक के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ, ABSL AMC भारतीय एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना हुआ है।