भारत में गोल्ड लोन का बाज़ार, खासकर पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए, दक्षिण भारत के 5 राज्यों में सिमटा हुआ है। ये राज्य कुल गोल्ड लोन आउटस्टैंडिंग का **80%** हिस्सा रखते हैं। कुल लोन **₹11.31 लाख करोड़** से ज़्यादा हो गया है, और अच्छी बात यह है कि बैड लोन (Gross Bad Loans) घटकर मात्र **0.12%** रह गया है। सोने की बढ़ती कीमतें इस ग्रोथ को सपोर्ट कर रही हैं, लेकिन बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर नज़र रखनी होगी।
दक्षिण भारत का गोल्ड लोन पर दबदबा
तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल – ये 5 दक्षिणी राज्य भारत में पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) द्वारा दिए गए कुल गोल्ड लोन का 80% रखते हैं। 31 मार्च 2026 तक, इन बैंकों का कुल गोल्ड लोन पोर्टफोलियो ₹11.31 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गया था। यह दिखाता है कि इन राज्यों में लोग सोने को कितनी अहमियत देते हैं। तमिलनाडु इस मामले में सबसे आगे है, जहाँ ₹4.12 लाख करोड़ से ज़्यादा का लोन दिया गया है।
क्यों है दक्षिण का दबदबा?
इन राज्यों में घरों में सोने का भंडार ज़्यादा होना और गोल्ड-लोन देने के लिए एक मजबूत सिस्टम का होना इस दबदबे की बड़ी वजह है। पब्लिक सेक्टर बैंक भले ही मार्केट का बड़ा हिस्सा रखते हों, लेकिन नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) सेक्टर भी तेज़ी से बढ़ रहा है। जून 2026 तक, NBFCs के गोल्ड लोन एसेट्स अंडर मैनेजमेंट ₹3.41 लाख करोड़ तक पहुंच गए थे, जो पिछले साल के मुकाबले 69% ज़्यादा है। यह दिखाता है कि बैंक और फाइनेंस कंपनियां, दोनों ही इस बढ़ते बाज़ार में ग्राहकों को लुभाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
एसेट क्वालिटी में सुधार
पूरे सेक्टर में लोन की क्वालिटी में काफी सुधार हुआ है। बैंकों ने अपनी लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो को टाइट किया है ताकि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचा जा सके। 31 मार्च 2026 तक, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) के लिए गोल्ड लोन सेगमेंट में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो घटकर 0.12% रह गया, जो एक साल पहले 0.19% था। इसी तरह, NBFCs के GNPA रेशियो में भी बड़ी गिरावट देखी गई है। यह बताता है कि भले ही लोन का वॉल्यूम बढ़ रहा हो, इन लोन्स की क्वालिटी मजबूत बनी हुई है।
बाज़ार के रिस्क
हालांकि, इस बाज़ार में कुछ ऐसे रिस्क भी हैं जिन पर लेंडर्स और इन्वेस्टर्स की नज़र है। बैंकों और NBFCs के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से इन लोन्स पर मिलने वाले इंटरेस्ट रेट (Yields) और प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा, चूंकि ये लोन सोने पर आधारित हैं, इसलिए यह सेक्टर ग्लोबल गोल्ड प्राइस में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति बहुत संवेदनशील है। सोने की कीमतों में अचानक गिरावट आने से लेंडर्स को अपनी शर्तें और सख़्त करनी पड़ सकती हैं।
भविष्य का अनुमान
आने वाले समय में, ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड लोन मार्केट में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि मार्च 2028 तक भारत में ऑर्गेनाइज्ड गोल्ड लोन ₹30 लाख करोड़ से ज़्यादा हो जाएगा। इंडस्ट्री का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि लेंडर्स ग्रोथ और प्राइस वोलेटिलिटी और बदलते रेगुलेटरी माहौल से जुड़े रिस्क को कितना बेहतर ढंग से मैनेज कर पाते हैं।
