360 ONE WAM का नेट प्रॉफिट दूसरी तिमाही में **4.4%** घटकर **₹302 करोड़** रहा। गिरावट की मुख्य वजह निवेश पर होने वाला 'पेपर लॉस' है, लेकिन कंपनी का कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट **20%** उछलकर **₹434 करोड़** पर पहुंच गया है।
मुनाफे में गिरावट का सच
कंपनी ने दूसरी तिमाही में ₹302 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। इस मामूली गिरावट के पीछे ₹110-120 करोड़ का मार्क-टू-मार्केट (Mark-to-market) लॉस है। इसे आसान भाषा में समझें तो यह कंपनी के निवेश पर हुआ 'पेपर लॉस' है, जिसका मतलब है कि जिन शेयर्स या एसेट्स में कंपनी ने निवेश किया है, उनकी मौजूदा मार्केट वैल्यू खरीद भाव से कम है। गौर करने वाली बात यह है कि यह घाटा कंपनी के कामकाज (Operations) से नहीं, बल्कि मार्केट वैल्यूएशन में बदलाव के कारण हुआ है।
कोर बिजनेस में दम
अगर पेपर लॉस को हटा दें, तो कंपनी का कोर बिजनेस शानदार प्रदर्शन कर रहा है। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 20% बढ़कर ₹434 करोड़ हो गया है। इसे ताकत मिली है एनुअल रिकरिंग रेवेन्यू (ARR) एसेट्स में आए ₹12,482 करोड़ के रिकॉर्ड इनफ्लो से। रिकरिंग रेवेन्यू मॉडल होने की वजह से कंपनी की कमाई अब ज्यादा अनुमानित और स्थिर हो गई है। कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में इन एसेट्स का हिस्सा अब 60% हो गया है, जो ₹3.53 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
भविष्य की तैयारी और एफिशिएंसी
मैनेजमेंट अब खर्चों को कम करने (Cost Efficiency) पर पूरा जोर दे रहा है। कंपनी का कॉस्ट-टू-ऑपरेटिंग-इनकम रेशियो फिलहाल 51.5% है, जिसे अगले 18 महीनों में 46-47% तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। ब्रोकरेज और डील-बेस्ड गतिविधियों से होने वाली आय में 9.1% की कमी जरूर आई है, लेकिन कंपनी का फोकस अब अस्थिर आय स्रोतों से हटकर स्टेबल फीस पर है।
आने वाले अप्रैल में कंपनी अपना एक बड़ा 'कैपिटल मार्केट्स प्लेटफॉर्म' लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। यह प्लेटफॉर्म इन्वेस्टमेंट बैंकिंग सर्विसेज के साथ मिलकर कंपनी के अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए ग्रोथ का नया जरिया बनेगा। फिलहाल रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 16.9% है, जिसे कंपनी 20% के लॉन्ग-टर्म टारगेट तक ले जाने की कोशिश कर रही है।
