360 ONE Asset के मेयूर पटेल को उम्मीद है कि FY27 की दूसरी छमाही में भारतीय कंपनियों की कमाई में ज़बरदस्त बढ़ोतरी होगी। इसकी वजह कच्चे तेल की घटती कीमतें और बढ़ता कंज्यूमर खर्च है। अगले छह महीनों में विदेशी निवेश (FII inflows) में भी बड़ी तेज़ी आ सकती है।
क्या है खास?
360 ONE Asset के प्रेसिडेंट और फंड मैनेजर, मेयूर पटेल का मानना है कि भारतीय कंपनियों की कमाई FY27 की दूसरी छमाही में शानदार रहने वाली है। उनके मुताबिक, मौजूदा अनुमान, जो निफ्टी 500 इंडेक्स के लिए 12% से 13% के आसपास हैं, थोड़े कम हो सकते हैं। पटेल का कहना है कि मैक्रोइकॉनॉमिक्स (macroeconomics) में आने वाले सकारात्मक बदलावों से यह ग्रोथ 15% के पार जा सकती है। इस अनुमान के पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है, जिससे कंपनियों की लागत कम होगी। साथ ही, कंज्यूमर खर्च (consumer spending) में रिकवरी और प्राइवेट कैपिटल इन्वेस्टमेंट (private capital investment) में स्थिरता भी इसे सहारा देगी।
विदेशी निवेश का नज़रिया
पिछले तीन सालों से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाज़ार में बिकवाली कर रहे हैं। पटेल बताते हैं कि इसकी वजह चीन के शेयरों का सस्ता होना और भारत में सीधे 'AI प्ले' (AI play) का न होना है। लेकिन, उन्हें उम्मीद है कि अगले 3 से 6 महीनों में स्थिति बदलेगी। भारतीय सरकारी बॉन्ड (government bonds) में बेहतर पहुंच और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा लिक्विडिटी (liquidity) और ग्रोथ पर ध्यान देने की वजह से, $60 अरब से $80 अरब तक का इनफ्लो (inflow) आ सकता है, जो बाज़ार को स्थिर कर सकता है।
RBI की पॉलिसी और ग्रोथ
हालांकि महंगाई 5% से ऊपर जाने की चर्चा है, पटेल का मानना है कि RBI ब्याज दरों को तुरंत बढ़ाने के बजाय इकोनॉमिक ग्रोथ (economic growth) को प्राथमिकता देगा। उनके अनुसार, RBI मौजूदा महंगाई को अस्थायी मान रहा है। लिक्विडिटी बनाए रखने पर ज़ोर देना कंपनियों के विस्तार और क्रेडिट ग्रोथ (credit growth) के लिए मददगार है, जिसका फायदा डोमेस्टिक डिमांड (domestic demand) पर निर्भर सेक्टर्स को मिलेगा।
सेक्टर्स पर राय और जोखिम
पटेल भारतीय आईटी सर्विसेज (IT services) सेक्टर को लेकर थोड़े सतर्क हैं। कुछ बड़ी कंपनियों के शेयर भले ही सस्ते हों, लेकिन जेनरेटिव AI (Generative AI) के इस्तेमाल से रेवेन्यू में गिरावट का खतरा है। उनका मानना है कि AI-संचालित बदलावों में IT कंपनियों को ठोस प्रगति दिखानी होगी, तभी यह सेक्टर आकर्षक बनेगा।
इसके उलट, वे बैंकिंग, एनबीएफसी (NBFCs), कंज्यूमर टेक्नोलॉजी (consumer technology) और टेलीकॉम (telecom) को हाई-पोटेंशियल वाले एरिया मानते हैं। बैंकों और एनबीएफसी पर उनका भरोसा सिस्टम क्रेडिट ग्रोथ (system credit growth) और RBI के स्ट्रेस टेस्ट (stress tests) में दिखी मजबूत एसेट क्वालिटी (asset quality) पर आधारित है। टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ते ARPU (Average Revenue Per User) और क्विक कॉमर्स (quick commerce) में बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी (profitability) की तरफ झुकाव भी डोमेस्टिक सर्विसेज के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को आने वाली तिमाही नतीजों पर नज़र रखनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि 15% की अनुमानित ग्रोथ हकीकत में बदलती है या नहीं। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों के इनफ्लो/आउटफ्लो (inflow/outflow) के आंकड़ों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा, ताकि पता चले कि $60-80 अरब का अपेक्षित इनफ्लो बाज़ार की लिक्विडिटी में झलक रहा है या नहीं। आखिर में, प्रमुख IT कंपनियों से AI का उनके रेवेन्यू मॉडल पर असर को लेकर मैनेजमेंट की कमेंट्री (management commentary) टेक्नोलॉजी सेक्टर में निवेश करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेगी।
