भारत में क्रेडिट के प्रति जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है। TransUnion CIBIL की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक 183 मिलियन भारतीय नागरिक अपने सिबिल स्कोर (CIBIL Score) को खुद से मॉनिटर कर रहे हैं। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 27% ज़्यादा है, जो दिखाता है कि क्रेडिट की जानकारी अब आम लोगों के लिए कितनी ज़रूरी हो गई है। इन स्कोर मॉनिटर करने वालों का औसत सिबिल स्कोर 728 रहा, और मज़े की बात ये है कि इनमें से लगभग 45% लोगों ने 6 महीनों के अंदर अपने स्कोर में सुधार भी दिखाया है।
युवा और नॉन-मेट्रो शहर सबसे आगे
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह युवा पीढ़ी, यानी मिलेनियल्स (Millennials) और जेन Z (Gen Z) हैं। ये 77% यूज़र्स का हिस्सा हैं। खास तौर पर जेन Z, दूसरे एज ग्रुप के लोगों के मुकाबले 1.41 गुना ज़्यादा बार अपना क्रेडिट स्कोर चेक करते हैं। उनकी ये वित्तीय सक्रियता सेमी-अर्बन और ग्रामीण इलाकों में गोल्ड लोन (Gold Loan) के ओरिजिनेशन में 61% और टू-व्हीलर लोन (Two-wheeler Loan) में 23% की बढ़ोतरी के रूप में भी दिख रही है। नॉन-मेट्रो शहरों का दबदबा भी ज़बरदस्त है, जो लगभग 75% मॉनिटर्स का घर हैं और यहां 28% की सालाना ग्रोथ देखी गई है। इन इलाकों में 78% नए क्रेडिट लेने वाले ग्राहक भी शामिल हैं, जो शहरों से बाहर भी फॉर्मल क्रेडिट की पहुंच को दर्शाता है। यह भी गौर करने वाली बात है कि 73% प्राइम क्रेडिट स्कोर (731+) वाले ग्राहक नॉन-मेट्रो लोकेशन्स में रहते हैं।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
महिलाओं ने भी अपनी फाइनेंसियल हेल्थ को लेकर ज़बरदस्त पहल की है। उनके क्रेडिट मॉनिटरिंग में 38% का उछाल आया है, जो पुरुषों की 25% बढ़ोतरी से कहीं ज़्यादा है। इस बढ़ोतरी के बाद मॉनिटरिंग बेस में महिलाओं की हिस्सेदारी 21% हो गई है। इनमें से 63% महिलाओं के प्राइम क्रेडिट स्कोर हैं, जो उनकी मज़बूत वित्तीय प्रबंधन क्षमता को दिखाता है। उनके गोल्ड लोन ओरिजिनेशन में भी 38% की वृद्धि हुई है।
लोन ट्रेंड्स और संभावित खतरे
क्रेडिट मॉनिटरिंग और बेहतर लोन एक्सेस के बीच एक सीधा संबंध दिखाई दे रहा है। स्कोर ट्रैक करने के 3 महीनों के भीतर गोल्ड लोन ओरिजिनेशन में 25% का इजाफा हुआ, जो जेन Z के लिए दोगुना रहा। टू-व्हीलर लोन 6% सालाना के हिसाब से बढ़े, और 17% मॉनिटर्स ने कंजम्पशन लोन (Consumption Loan) भी लिए। हालांकि, बढ़ते मॉनिटरिंग और बेहतर स्कोर के बावजूद, कुछ संभावित खतरे भी सामने आ रहे हैं। युवाओं और नॉन-मेट्रो इलाकों में गोल्ड और टू-व्हीलर लोन पर बढ़ती निर्भरता आर्थिक अस्थिरता या अनिश्चित आय के कारण सुरक्षित लोन की ओर झुकाव का संकेत हो सकती है। मार्च 2025 तक भारत का हाउसहोल्ड डेट (Household Debt) जीडीपी का 41.3% पहुंच गया है, जिसमें रिटेल लोन (Retail Loan) कंजम्पशन के लिए सबसे बड़ा हिस्सा हैं। यह, आय वृद्धि पर क्रेडिट-संचालित उपभोग पर ध्यान देने के साथ मिलकर, भविष्य में लोन चुकाने की क्षमता और क्रेडिट रिस्क पर सवाल खड़े करता है। फिनटेक (Fintech) सेक्टर भी सुधार का सामना कर रहा है, कई स्टार्टअप बंद हो रहे हैं, जो अधिक स्थिर बिजनेस मॉडल की ओर बदलाव का संकेत है।
TransUnion का आउटलुक
TransUnion (TRU), मूल कंपनी, एक गतिशील वैश्विक बाज़ार में काम करती है। मार्च 2026 तक, इसकी मार्केट कैप $13.51 बिलियन से $14.36 बिलियन के बीच थी, जिसका पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) 19.66 से 33.40 के बीच रहा। विश्लेषक TRU स्टॉक पर 'मॉडरेट बाय' (Moderate Buy) की राय रखते हैं, जिसका औसत टारगेट प्राइस लगभग $94.54 से $95.00 है। भारतीय फिनटेक बाज़ार के 2031 तक $109.06 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें डिजिटल पेमेंट और मोबाइल ऐप का बड़ा योगदान होगा। जबकि क्रेडिट मॉनिटरिंग के रुझान सकारात्मक हैं, बढ़ता हाउसहोल्ड डेट और कंजम्पशन लोन पर ध्यान चिंता का विषय है। FY26 में भारत की कुल क्रेडिट ग्रोथ 13.7%–14.3% रहने का अनुमान है, जिसमें रिटेल और एमएसएमई (MSME) सेक्टर सबसे आगे होंगे, लेकिन इस विस्तार की प्रकृति और लंबी अवधि की स्थिरता महत्वपूर्ण कारक रहेंगे।
