यूरोप का बड़ा दांव: 12 बैंक लॉन्च कर रहे हैं Euro Stablecoin, डॉलर को देंगे सीधी टक्कर!

BANKINGFINANCE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
यूरोप का बड़ा दांव: 12 बैंक लॉन्च कर रहे हैं Euro Stablecoin, डॉलर को देंगे सीधी टक्कर!
Overview

यूरोप के **12 बड़े बैंक** मिलकर एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं! Qivalis consortium नाम के समूह ने **2026 की दूसरी छमाही** तक एक नया Euro-denominated (यूरो-आधारित) Stablecoin लॉन्च करने का ऐलान किया है। यह कदम EU के MiCAR रेगुलेशन के तहत होगा और इसका मुख्य मकसद डिजिटल करेंसी मार्केट में अमेरिकी डॉलर का दबदबा कम करना है।

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यह पहल Qivalis कंसोर्टियम द्वारा की जा रही है, जिसमें BBVA, BNP Paribas, और UniCredit जैसे बड़े बैंक शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट को क्रिप्टो कस्टडी फर्म Fireblocks का समर्थन हासिल है, जो 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के ट्रांजैक्शन संभाल चुकी है और 2,400 से ज्यादा संस्थानों के साथ काम करती है। इस नए स्टेबलकॉइन को 2026 की दूसरी छमाही में लॉन्च किया जाएगा और यह पूरी तरह से डच सेंट्रल बैंक (DNB) के नियमों के तहत काम करेगा, साथ ही EU के MiCAR (मार्केट्स इन क्रिप्टो-एसेट्स रेगुलेशन) का भी पालन करेगा। MiCAR रेगुलेशन खास तौर पर एसेट-रेफर्ड टोकन (ARTs) और ई-मनी टोकन (EMTs) के इश्यूअर्स के लिए कड़े नियम तय करता है, जैसे कि रिजर्व बैकिंग, पारदर्शिता और ऑपरेशनल स्टैंडर्ड्स। डच सेंट्रल बैंक के नियमों के अनुसार, स्टेबलकॉइन इश्यूअर्स को जारी की गई वैल्यू के 100% के बराबर लिक्विड रिजर्व बनाए रखने होंगे।

डॉलर के दबदबे को चुनौती

Qivalis प्रोजेक्ट के सामने एक बड़ी चुनौती है: मौजूदा डिजिटल करेंसी मार्केट में 99% ट्रेडिंग वॉल्यूम पर अमेरिकी डॉलर-आधारित स्टेबलकॉइन्स का कब्जा है, जिनकी मार्केट वैल्यू जनवरी 2026 तक करीब 305 बिलियन डॉलर है। इसकी तुलना में, यूरो-आधारित स्टेबलकॉइन्स का हिस्सा बहुत कम, लगभग 650 मिलियन डॉलर है। हालांकि, नॉन-यूएस डॉलर स्टेबलकॉइन मार्केट में यूरो-आधारित टोकन की हिस्सेदारी 80% से ज्यादा है। कंसोर्टियम का मानना है कि MiCAR से मिलने वाली रेगुलेटरी स्पष्टता यूरोपीय कंपनियों को कंप्लायंट स्टेबलकॉइन्स की ओर खींचेगी। उनकी रणनीति एक सुरक्षित, बैंक-समर्थित विकल्प पेश करना है, जो मुख्य रूप से बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) पेमेंट्स, क्रॉस-बॉर्डर सेटलमेंट्स और डिजिटल एसेट ट्रांजैक्शंस पर केंद्रित होगा, न कि रिटेल स्पेक्युलेशन पर। इस पहल का लक्ष्य यूरोप की डिजिटल सॉवरेनिटी को बढ़ाना और यूरो की ऑन-चेन उपस्थिति को मजबूत करना है।

राह में हैं ये बाधाएं

हालांकि इस पहल को बड़े बैंकों का समर्थन और MiCAR कंप्लायंस का फायदा है, लेकिन इसे कई एग्जीक्यूशन रिस्क का सामना करना पड़ेगा। डॉलर-पेग्ड एसेट्स जैसे Tether (USDT) और Circle's USDC के प्रभुत्व को तोड़ना आसान नहीं होगा, क्योंकि उनके पास पहले से ही गहरा लिक्विडिटी और व्यापक नेटवर्क है। बारह बैंकों वाले कंसोर्टियम मॉडल में डिसीजन-मेकिंग और ऑपरेशनल अलाइनमेंट को लेकर जटिलताएं आ सकती हैं। MiCAR एक यूनिफाइड फ्रेमवर्क होने के बावजूद, राष्ट्रीय रेगुलेटर्स द्वारा इसके अनुप्रयोग में अंतर पर्यवेक्षी बाधाएं पैदा कर सकता है। साथ ही, 2026 की शुरुआत में लागू होने वाले बेसल कमेटी के संशोधित क्रिप्टो स्टैंडर्ड्स रिजर्व एसेट रिक्वायरमेंट्स को स्पष्ट करेंगे, लेकिन उनका पूरा बाजार प्रभाव अभी अनिश्चित है। Visa जैसी कंपनियां अपने स्टेबलकॉइन सेटलमेंट वॉल्यूम को 4.5 बिलियन डॉलर के एनुअलाइज्ड रन रेट तक पहुंचा चुकी हैं, जो पारंपरिक पेमेंट सिस्टम में स्टेबलकॉइन्स के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है। 2026 के अंत तक स्टेबलकॉइन्स का कुल मार्केट कैप 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है। Qivalis की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह कितनी जल्दी बाजार में हिस्सेदारी हासिल कर पाता है और 2028 तक संभावित डिजिटल यूरो के लॉन्च से पहले अपने टोकन को यूरोज़ोन की डिजिटल वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना पाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.