115 मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों का लिक्विडेशन जारी, निवेशकों का पैसा फंसा, रिफंड का इंतज़ार

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AuthorNeha Patil|Published at:
115 मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों का लिक्विडेशन जारी, निवेशकों का पैसा फंसा, रिफंड का इंतज़ार

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने पुष्टि की है कि 115 मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियों का लिक्विडेशन (liquidation) चल रहा है। जमाकर्ताओं को संपत्ति बिकने और कर्ज चुकाए जाने के बाद ही पैसा मिलेगा। इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए कोई फास्ट-ट्रैक कोर्ट (fast-track court) बनाने की योजना नहीं है।

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि 115 मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटियां (multi-state cooperative societies) फिलहाल लिक्विडेशन (liquidation) की प्रक्रिया में हैं। कॉर्पोरेट मामलों के राज्य मंत्री, हर्ष मल्होत्रा ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि जमाकर्ताओं (depositors) के रिफंड की प्रक्रिया कानूनी लिक्विडेशन की समय-सीमा से जुड़ी हुई है। मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 के तहत, लिक्विडेटर (liquidator) द्वारा सोसाइटी की संपत्तियों की बिक्री पूरी होने और सभी बकाया देनदारियों (liabilities) के भुगतान के बाद ही पैसा वापस किया जा सकता है।

फास्ट-ट्रैक कोर्ट की कोई योजना नहीं

अटके हुए फंड तक जल्दी पहुंचने की चाह रखने वाले निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सरकार ने इन मामलों के लिए विशेष या फास्ट-ट्रैक अदालतों (fast-track courts) के गठन को सिरे से खारिज कर दिया है। आधिकारिक रुख यह है कि 2002 के एक्ट के तहत मौजूदा कानूनी ढांचे का पालन किया जाना चाहिए। इसका मतलब है कि रिफंड की गति इस बात पर निर्भर करेगी कि लिक्विडेटर इन 115 सोसाइटियों की संपत्ति या वित्तीय संपत्तियों को कितनी जल्दी पहचान, मूल्यांकन और बेच पाते हैं। चूंकि कानूनी विवादों में संपत्ति की बिक्री अक्सर समय लेने वाली होती है, इसलिए यह प्रक्रिया प्रभावित जमाकर्ताओं के लिए एक लंबी अवधि की निगरानी योग्य (long-term monitorable) बनी रह सकती है।

सहारा ग्रुप रिफंड की स्थिति

बहुचर्चित सहारा मामले (Sahara case) के संबंध में, आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की निगरानी में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। 2023 के निर्देश के बाद, 10,000 करोड़ रुपये कोऑपरेटिव सोसाइटीज के सेंट्रल रजिस्ट्रार (Central Registrar of Cooperative Societies) को वितरण के लिए हस्तांतरित किए गए थे। 28 जुलाई 2026 तक, सरकार ने बताया कि 41.5 लाख योग्य जमाकर्ताओं को 9,265 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। यह 2012 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से उत्पन्न एक लंबे समय से चले आ रहे कानूनी लड़ाई का परिणाम है, जिसमें वैकल्पिक फुली कनवर्टिबल डिबेंचर (optional fully convertible debentures) शामिल थे। निवेशक सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज से किसी भी शेष या भविष्य के वितरण चरणों के बारे में अपडेट ट्रैक करना जारी रख सकते हैं।

अन्य संकटग्रस्त सहकारी सोसाइटियों से जुड़े लोगों के लिए मुख्य चिंता एक सरलीकृत या त्वरित कानूनी रास्ते की कमी है। वर्तमान नियामक वातावरण (regulatory environment) वास्तविक संपत्तियों के आधार पर दावों के व्यवस्थित निपटान पर जोर देता है, न कि तत्काल तरलता (liquidity) पर, जो वित्तीय दिवालियापन (financial insolvency) का सामना कर रही सोसाइटियों में जमा राशि वाले लोगों के लिए पूंजी हानि (capital loss) या विस्तारित प्रतीक्षा समय के जोखिम को रेखांकित करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.