Wheels India ने सितंबर तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट **88%** की छलांग लगाकर **₹60 करोड़** पहुंच गया है, जिसके पीछे अमेरिका से बढ़ती डिमांड और **₹430 करोड़** की फंडरेजिंग का बड़ा हाथ है।
मुनाफे की रफ्तार
सितंबर तिमाही में Wheels India ने अपनी बैलेंस शीट को मजबूती दी है। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल के ₹32 करोड़ से बढ़कर ₹60 करोड़ पर पहुंच गया है। वहीं, रेवेन्यू 36% की ग्रोथ के साथ ₹1,723 करोड़ दर्ज किया गया। इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह अमेरिका को होने वाले एक्सपोर्ट में 50% की भारी बढ़ोतरी रही है, खासकर अर्थमूवर व्हील्स (earthmover wheels) की जबरदस्त मांग ने नतीजों को बूस्ट किया है।
कैपेक्स और रणनीति
कंपनी ने अपनी फाइनेंशियल स्थिति सुधारने के लिए ₹430 करोड़ जुटाए हैं, जिसका उपयोग कर्ज कम करने के लिए किया गया है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) प्लान को भी बढ़ाया है। चालू फाइनेंशियल ईयर में कंपनी ₹400 करोड़ से ₹450 करोड़ तक का निवेश करने वाली है, जबकि पहले यह औसत ₹250 करोड़ रहता था। यह निवेश मुख्य रूप से प्रोडक्शन की बाधाओं को दूर करने और पैसेंजर व्हीकल, ट्रक और ट्रैक्टर सेगमेंट में क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित है।
आगे की राह और चुनौतियां
शानदार नतीजों के बावजूद मैनेजमेंट ने दूसरी छमाही के लिए सावधानी बरतने के संकेत दिए हैं। इन्फ्लेशनरी प्रेशर (inflationary pressure) का सीधा असर मार्जिन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, पिछले साल GST 2.0 के कारण मिले सपोर्ट से तुलना करें तो इस बार बेस काफी ऊंचा है, जो चुनौती पेश कर सकता है। निवेशकों के लिए कंपनी द्वारा कैपेक्स का सही इस्तेमाल और मार्जिन को प्रोटेक्ट करना सबसे अहम मॉनिटरेबल (monitorable) रहेगा।
