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West Bengal EV Sales: पश्चिम बंगाल में EV की तूफानी ग्रोथ! 153% उछाल के साथ टॉप राज्यों को पीछे छोड़ा

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AuthorMehul Desai|Published at:
West Bengal EV Sales: पश्चिम बंगाल में EV की तूफानी ग्रोथ! 153% उछाल के साथ टॉप राज्यों को पीछे छोड़ा
Overview

भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बाजार में 2026 के फाइनेंशियल ईयर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल (West Bengal) में EV की बिक्री में **153%** की जोरदार उछाल आई है, जिससे इसका मार्केट शेयर दोगुना होकर **5.5%** हो गया है। यह ग्रोथ उन प्रमुख राज्यों से कहीं ज्यादा है जो अब तक EV मार्केट के लीडर माने जाते थे।

पश्चिम बंगाल में EV क्रांति

FY26 के दौरान, पश्चिम बंगाल में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 153% बढ़कर 1,32,170 यूनिट्स तक पहुंच गई। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत राज्य का मार्केट शेयर 2.7% से बढ़कर 5.5% हो गया, जो किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। यह दिखाता है कि EV को अपनाने की क्षमता अब सिर्फ शुरुआती अपनाने वाले राज्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तेजी से विस्तार हो रहा है।

बड़े राज्यों का मार्केट शेयर घटा

हालांकि, इस दौरान उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पारंपरिक EV मार्केट लीडर्स ने अपनी बाजार हिस्सेदारी खो दी। उत्तर प्रदेश, जो 4,08,439 यूनिट्स की बिक्री के साथ सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, उसका राष्ट्रीय मार्केट शेयर 2.3 प्रतिशत अंकों से घटकर 16.9% रह गया। महाराष्ट्र, दूसरा सबसे बड़ा बाजार, 11.2% की बिक्री वृद्धि के बावजूद 11.3% मार्केट शेयर के साथ पिछड़ गया। हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में या तो ग्रोथ स्थिर रही या बिक्री में गिरावट देखी गई।

राष्ट्रीय स्तर पर ग्रोथ और सरकारी नीतियां

पूरे भारत में EV बाजार में मजबूत ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। अनुमान है कि 2026 तक यह बाजार $31.09 अरब का हो जाएगा, और 2035 तक 52.56% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। मध्य प्रदेश में बिक्री 45.5% बढ़कर 1,56,591 यूनिट्स तक पहुंची, जिससे इसका शेयर 6.5% हो गया। वहीं, तमिलनाडु की बिक्री 35.9% बढ़कर 1,87,145 यूनिट्स रही, जिससे इसका शेयर 7.8% तक पहुंच गया। इन राज्यों की ग्रोथ को सरकारी नीतियों, जैसे टैक्स छूट और सब्सिडी, और FAME II जैसी राष्ट्रीय योजनाओं का बड़ा सहारा मिला है। FY25 के अंत तक, भारत में कुल EV बिक्री 20 लाख यूनिट्स को पार कर गई थी, जिसमें इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर की हिस्सेदारी 85% से ज्यादा थी।

ग्रोथ के सामने चुनौतियाँ

इन सकारात्मक रुझानों के बावजूद, भारतीय EV बाजार में कई चुनौतियां बनी हुई हैं। सबसे बड़ी चिंता लिथियम-आयन बैटरी सेल के आयात पर भारी निर्भरता है, क्योंकि घरेलू उत्पादन अभी भी विकसित हो रहा है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास धीमा है, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में, जिससे 'रेंज एंजाइटी' (Range Anxiety) की समस्या बनी हुई है। EVs की शुरुआती ऊंची कीमत भी बड़े पैमाने पर अपनाने में एक बड़ा रोड़ा है।

भविष्य की राह

विश्लेषकों का अनुमान है कि भारतीय EV बाजार 19.0% की CAGR के साथ 2032 तक $17.88 अरब तक पहुंच सकता है। सरकार स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने, चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और R&D में निवेश बढ़ाने पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है। उम्मीद है कि 2030 तक सालाना EV बिक्री 17 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच जाएगी, जिससे भारत अपने विद्युतीकरण लक्ष्यों को हासिल कर सकेगा।

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