Volvo Car India अपनी प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) रणनीति पर फिर से विचार कर रही है। हाइब्रिड कारों पर **40%** टैक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) पर केवल **5%** टैक्स के कारण कंपनी को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत में लग्जरी कार सेगमेंट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। Volvo Car India के लिए फिलहाल स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि हाइब्रिड कारों पर लगने वाला 40% का भारी-भरकम टैक्स इसे ग्राहकों के लिए कम आकर्षक बना रहा है, जबकि बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक कारों (BEVs) पर सिर्फ 5% GST लगता है। यह टैक्स का अंतर कंपनी की हाइब्रिड पोर्टफोलियो योजना को प्रभावित कर रहा है।
इलेक्ट्रिक सेगमेंट पर जोर
टैक्स की दिक्कतों के बावजूद, कंपनी का मुख्य फोकस पूरी तरह से इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर है। वर्तमान में Volvo की कुल बिक्री में EVs की हिस्सेदारी 25% है। कंपनी अपने प्रीमियम पोर्टफोलियो को मजबूत करने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके तहत फ्लैगशिप इलेक्ट्रिक SUV EX90 को जनवरी 2027 में भारत में लॉन्च किया जाना है।
ग्लोबल चुनौतियां और बढ़ती लागत
कंपनी के सामने केवल स्थानीय टैक्स की बाधाएं ही नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याएं भी खड़ी हैं। Volvo Cars ने वैश्विक स्तर पर अपने 2026 के सेल्स वॉल्यूम और कैश फ्लो के अनुमान को वापस ले लिया है, जिसका असर भारतीय बाजार की परिचालन लागत (Operating Costs) पर भी पड़ रहा है।
कंपनी ने 2026 की पहली तिमाही के बाद से कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन अब बढ़ते खर्चों को देखते हुए त्योहारी सीजन में कारों की कीमतों में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी डिमांड को प्रभावित किए बिना अपनी प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रखती है। इस संबंध में स्पष्ट तस्वीर अक्टूबर 2026 में आने वाले ग्लोबल Q3 नतीजों के बाद ही साफ हो पाएगी।
