Volkswagen और JSW Group के बीच प्रस्तावित **51:49** जॉइंट वेंचर पर संकट के बादल छा गए हैं। कंपनी के सामने **$1.4 बिलियन** का भारी-भरकम टैक्स विवाद आ गया है, जिसे लेकर JSW कोई भी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है।
टैक्स विवाद बना सबसे बड़ी रुकावट
Volkswagen और JSW Group का जॉइंट वेंचर भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) कारों के उत्पादन के लिए तैयार किया जा रहा था। लेकिन इस साझेदारी की राह में $1.4 बिलियन का टैक्स विवाद दीवार बनकर खड़ा है। यह मामला वर्ष 2012 से 2024 के बीच व्हीकल असेंबली किट्स के कथित गलत वर्गीकरण से जुड़ा है, जो फिलहाल मुंबई कोर्ट में चल रहा है। JSW का साफ कहना है कि वह इस बड़ी कानूनी देनदारी का बोझ नहीं उठाएगी।
मार्केट शेयर बढ़ाने की रणनीति
भारत में Volkswagen का मार्केट शेयर फिलहाल केवल 2% के करीब है। कंपनी के लिए यह पार्टनरशिप Maruti Suzuki, Hyundai और Tata Motors जैसे दिग्गजों को टक्कर देने का एक बड़ा जरिया हो सकती थी। JSW MG Motor India की हलोल स्थित मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का इस्तेमाल कर Volkswagen अपनी प्रोडक्शन लागत कम करना चाहती थी, जिससे वे भारत में तेजी से अपने पांव पसार सकें।
निवेशकों के लिए आगे की राह
दोनों कंपनियां 2026 के अंत तक इस करार को फाइनल करने का लक्ष्य लेकर चल रही थीं। हालांकि, अब जब तक टैक्स विवाद का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक यह डील केवल अटकलों के दायरे में है। जानकारों का मानना है कि निवेशकों को फिलहाल आधिकारिक घोषणाओं का इंतजार करना चाहिए, क्योंकि टैक्स का मामला ही तय करेगा कि यह पार्टनरशिप वाकई जमीन पर उतरेगी या नहीं।
