Volkswagen Group ने अपने 'Future Plan 2030' को मंजूरी दे दी है। कंपनी का लक्ष्य ऑपरेटिंग मार्जिन को **9%** तक पहुंचाना है, जिसके लिए **50,000** कर्मचारियों की छंटनी और ग्लोबल मॉडल पोर्टफोलियो को आधा करने का बड़ा फैसला लिया गया है।
फाइनेंशियल हेल्थ सुधारने की कोशिश
ऑटो सेक्टर की दिग्गज कंपनी Volkswagen Group अब तक के अपने सबसे बड़े रीस्ट्रक्चरिंग प्लान पर काम कर रही है। 3 सितंबर, 2026 को बोर्ड ने 'Future Plan 2030' को मंजूरी दी है। यह फैसला कंपनी के लिए बेहद जरूरी हो गया था क्योंकि 2026 की पहली छमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन केवल 3.8% के करीब सिमट गया था। अब मैनेजमेंट का लक्ष्य इसे 9% तक ले जाने का है।
कैसे कम होगा खर्च?
कंपनी ने खर्च घटाने के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं। पहला, 2030 तक कुल 1,00,000 नौकरियों में कटौती का टारगेट रखा गया है, जिसमें अभी 50,000 नए पद कम किए जाएंगे। दूसरा, कंपनी अपने ग्लोबल मॉडल पोर्टफोलियो को 2035 तक आधा कर देगी। इसका मकसद जटिलता को खत्म करना और मुनाफा देने वाले सेगमेंट पर फोकस करना है।
जर्मन मैन्युफैक्चरिंग हब्स पर संकट
इस फैसले का असर जर्मनी में स्थित चार मुख्य प्लांटों पर पड़ने वाला है। इसमें Audi का Neckarsulm प्लांट, Emden, Zwickau और Hanover शामिल हैं, जिन्हें 2031 से 2034 के बीच बंद करने की योजना है। हालांकि अभी लेबर यूनियनों के साथ समझौता हो गया है, लेकिन भविष्य में ये प्लांट अनिश्चितता के दौर में हैं।
मार्केट का मुकाबला और रिस्क
Volkswagen के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन की कंपनियों, विशेषकर BYD से मिल रही टक्कर है। जर्मनी में मैन्युफैक्चरिंग की ऊंची लागत और चीन के मार्केट में घटती बिक्री ने कंपनी के मुनाफे पर दबाव बनाया है। निवेशकों को आने वाले दिनों में लेबर यूनियन के साथ होने वाली बातचीत और क्वार्टरली नतीजों में मार्जिन सुधार पर कड़ी नजर रखनी होगी।
