उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) अब भारत का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) हब बनकर उभरा है। राज्य में **17.5 लाख** से ज़्यादा ई-रिक्शा चल रहे हैं, जिन्होंने हज़ारों लोगों को रोज़गार दिया है। अब सरकार **2026** के एग्रीगेटर रूल्स के ज़रिए इस सेक्टर को और व्यवस्थित बनाने पर ज़ोर दे रही है।
ई-रिक्शा की तूफानी पकड़
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) के मामले में सबसे आगे निकल गया है। यहां 17.5 लाख से ज़्यादा ई-रिक्शा का बेड़ा है। मज़े की बात ये है कि ये बढ़ोतरी हाई-एंड इलेक्ट्रिक कारों या बाइक्स से नहीं, बल्कि आम ई-रिक्शा की भारी डिमांड की वजह से हुई है। छोटे शहरों और कस्बों में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए ई-रिक्शा लोगों की पहली पसंद बन गए हैं। साथ ही, इन्होंने लाखों निम्न-आय वर्ग के लोगों के लिए रोज़गार का एक बड़ा ज़रिया भी खोला है।
बढ़ती भीड़ और अनियंत्रित सेक्टर
हालांकि, ई-रिक्शा की इस भारी तादाद की वजह से लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ गई है। पहले इस सेक्टर में ज़्यादा नियम-कायदे नहीं थे, जिसकी वजह से सुरक्षा, रूट प्लानिंग और पार्किंग जैसी ज़रूरी चीज़ों पर ध्यान नहीं दिया गया।
नए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की एंट्री
इस असंगठित सेक्टर को पटरी पर लाने के लिए, राज्य सरकार ने मई 2026 में 'उत्तर प्रदेश मोटर व्हीकल्स (एग्रीगेटर और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर) रूल्स, 2026' लागू किए हैं। इस नियम का मकसद सुरक्षा को बेहतर बनाना, जवाबदेही तय करना और फ्लीट ऑपरेटर्स के लिए एक ढांचा तैयार करना है। कड़े नियमों से इस इंडस्ट्री के एक बड़े हिस्से को फॉर्मल मॉडल की ओर ले जाने की कोशिश की जा रही है, जिसका असर छोटे फ्लीट मालिकों पर पड़ सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस का पेंच
नियमों के अलावा, दो बड़ी चुनौतियां सामने हैं: इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस। ई-रिक्शा के लिए चार्जिंग स्टेशन का अभी भी अभाव है। कई ऑपरेटर्स अभी भी अनौपचारिक तरीकों से ही चार्जिंग करते हैं, जो भरोसेमंद नहीं है।
फाइनेंस के मामले में, यह सेक्टर अनौपचारिक लोन पर बहुत ज़्यादा निर्भर है। बहुत से ड्राइवर ऊंचे ब्याज दरों पर लोन लेकर गाड़ियां खरीदते हैं, जिससे वे आर्थिक रूप से कमज़ोर हो जाते हैं। अगर बाज़ार में मंदी आती है या बिजली जैसी ज़रूरी चीज़ों की कीमतें बढ़ती हैं, तो यह भारी कर्ज़ इन मालिकों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।
आगे क्या?
उत्तर प्रदेश के EV मार्केट का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि नए एग्रीगेटर रूल्स कितने प्रभावी साबित होते हैं और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को कैसे पूरा किया जाता है। ई-रिक्शा ने जहां लोगों को सस्ता ट्रांसपोर्ट और रोज़गार दिया है, वहीं अब एक रेगुलेटेड और ज़्यादा व्यवस्थित बाज़ार की ओर बढ़ना सबसे अहम होगा। सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट को इलेक्ट्रिक बनाने पर भी ज़ोर दे रही है, जैसे इलेक्ट्रिक बसों का परिचालन। देखना होगा कि यह ई-रिक्शा नेटवर्क के साथ मिलकर ट्रैफिक जाम को और बढ़ाता है या मदद करता है।
