ऑटो कंपोनेंट बनाने वाली दिग्गज कंपनी Uno Minda ने देश के चार राज्यों—तमिलनाडु, हरियाणा, महाराष्ट्र और कर्नाटक में अपने कारोबार को विस्तार देने के लिए **₹1,415 करोड़** के निवेश की घोषणा की है। इस कदम का मकसद इलेक्ट्रिक और पारंपरिक वाहनों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Uno Minda ने मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने और OEM (ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स) की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। कंपनी के बोर्ड ने 14 सितंबर 2026 को इस बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान को मंजूरी दी है, जिसमें ICE और EV दोनों तरह के प्लेटफॉर्म्स पर फोकस किया गया है।
निवेश का बंटवारा (Breakdown)
कंपनी की योजना के अनुसार:
- महाराष्ट्र: कंपनी की सहयोगी Toyoda Gosei South India Private Limited के जरिए ₹670 करोड़ का निवेश नए प्लांट में होगा, जो एयरबैग और इंटीरियर कंपोनेंट्स बनाएगा।
- तमिलनाडु: होसुर में ₹510 करोड़ की लागत से एक ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम कास्टिंग फैसिलिटी तैयार की जाएगी।
- हरियाणा: खरखौदा में टू-व्हीलर अलॉय व्हील प्लांट के लिए ₹155 करोड़ का निवेश होगा।
- बेंगलुरु: सब्सिडियरी कंपनी Uno Minda Kyoraku की मोल्डिंग ऑपरेशंस बढ़ाने के लिए ₹80 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
इन सभी प्रोजेक्ट्स के 2029 फाइनेंशियल ईयर तक चरणों में शुरू होने की उम्मीद है।
फंड जुटाने का तरीका और जोखिम
इस भारी निवेश के लिए कंपनी ने ₹600 करोड़ नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) और ₹500 करोड़ कमर्शियल पेपर के जरिए जुटाने का निर्णय लिया है। बाकी राशि इंटरनल कैश और टर्म लोन से आएगी। हालांकि, बढ़ते कर्ज का बोझ निवेशकों के लिए एक चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि प्रोजेक्ट में देरी होने पर फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी पर असर पड़ सकता है।
मार्केट और मार्जिन का गणित
ऑटो सेक्टर में कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और गैस की बढ़ती लागत कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल सकती है। कंपनी ने 11% EBITDA मार्जिन का लक्ष्य रखा है, जिसमें 50 बेसिस पॉइंट्स तक का बदलाव हो सकता है। अब निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी कितनी कुशलता से इतने बड़े प्रोजेक्ट्स को बिना बजट बिगड़े समय पर पूरा कर पाती है।
