EV स्टार्टअप Ultraviolette Automotive ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए Series E फंडिंग में **$8.5 करोड़** जुटाए हैं। इस निवेश से कंपनी तमिलनाडु में नया प्लांट लगाएगी, जिससे सालाना प्रोडक्शन **2.5 लाख** यूनिट्स तक पहुंच जाएगा।
बड़े विस्तार की तैयारी
बेंगलुरु स्थित EV स्टार्टअप Ultraviolette Automotive ने अपनी फंडिंग के इस नए दौर (Series E) में $8.5 करोड़ का भारी निवेश हासिल किया है। इस राउंड का नेतृत्व Yali Capital और TDK Ventures ने किया है। कंपनी इस पूंजी का बड़ा हिस्सा तमिलनाडु में बनने वाली अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में लगाएगी। वर्तमान में कंपनी की क्षमता 50,000 से 60,000 गाड़ियां सालाना है, जिसे अब बढ़ाकर पहले चरण में 2.5 लाख और आने वाले दो सालों में 5 लाख यूनिट्स तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
टेक्नोलॉजी और स्ट्रेटेजिक फोकस
कंपनी ने अपनी अलग पहचान बनाने के लिए हाई-वोल्टेज बैटरी आर्किटेक्चर पर दांव लगाया है, जो आमतौर पर भारतीय बाजार में दिखने वाले 48-वोल्ट सिस्टम से कहीं ज्यादा पावरफुल है। आने वाले मॉडल्स, जैसे 'Tesseract' स्कूटर और 'Shockwave' मोटरसाइकिल में यही टेक्नोलॉजी इस्तेमाल की जाएगी। इंटेल (Intel) के पूर्व एक्जीक्यूटिव लिप-बू टैन (Lip-Bu Tan) का निवेशक और सलाहकार के तौर पर जुड़ना, कंपनी की इंजीनियरिंग क्षमता पर मोहर लगाता है।
ग्लोबल विस्तार और चुनौतियां
Ultraviolette अब अपने पैर पसारने के लिए अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका की ओर देख रही है। इसके अलावा, भारत में भी कंपनी अपने आउटलेट्स को दोगुना कर साल के अंत तक 100 से अधिक लोकेशंस तक ले जाने की योजना बना रही है।
हालांकि, प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल का सेक्टर काफी कॉम्पिटिटिव है। इतनी बड़ी फंडिंग के बाद भी कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बिना किसी देरी या कॉस्ट ओवररन के समय पर पूरा करना है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब तमिलनाडु प्लांट के शुरू होने की टाइमलाइन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी की सफलता पर टिकी है, क्योंकि इसी से कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन का भविष्य तय होगा।
