कर्नाटक में EV मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार
Ultraviolette Automotive ने कर्नाटक सरकार के साथ एक पांच-वर्षीय निवेश रोडमैप पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू (MoU) के तहत, कंपनी अपनी मौजूदा उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए शुरुआती चरण में ₹200 करोड़ का निवेश करेगी। इसके बाद, कंपनी एक नई ग्रीनफील्ड फैसिलिटी स्थापित करने की योजना बना रही है, जिसका लक्ष्य सालाना 1.5 लाख यूनिट का उत्पादन करना होगा। यह कदम लोकल कंपोनेंट्स के इस्तेमाल को बढ़ावा देगा और कर्नाटक के बढ़ते इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इकोसिस्टम को मजबूत करेगा।
EV दिग्गजों से कड़ा मुकाबला
कंपनी की विस्तार योजनाएं ऐसे समय में आ रही हैं जब भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में मुकाबला बहुत कड़ा हो गया है। Ather Energy जैसी कंपनियां सालाना 1.42 मिलियन यूनिट तक की क्षमता का लक्ष्य रख रही हैं, जबकि Ola Electric का लक्ष्य मार्च 2026 तक 10 लाख व्हीकल बनाना है। इनकी तुलना में, Ultraviolette ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में लगभग 1,168 व्हीकल बेचे, जो स्केल के मामले में एक बड़ा अंतर दिखाता है।
मुनाफे की चुनौती के बीच विस्तार
कंपनी की महत्वाकांक्षी विस्तार योजनाएं और भारी निवेश महत्वपूर्ण चुनौतियों के साथ आ रहे हैं। Ultraviolette अब तक $149 मिलियन से अधिक जुटा चुकी है, जिसकी लेटेस्ट वैल्यूएशन लगभग $450 मिलियन आंकी गई है। हालांकि, कंपनी अभी भी मुनाफे के लिए संघर्ष कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में, कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू केवल ₹32.3 करोड़ रहा, जबकि नेट लॉस बढ़कर ₹116 करोड़ हो गया। यह वित्तीय स्थिति उत्पादन विस्तार के लक्ष्यों के बिल्कुल विपरीत है।
वैश्विक लक्ष्य और बड़ी चुनौतियाँ
डोमेस्टिक मार्केट के अलावा, Ultraviolette ने 12 यूरोपीय देशों में एंट्री की है और 2028 तक अपने कुल रेवेन्यू का 30-35% एक्सपोर्ट से हासिल करने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, इस ग्लोबल प्रेजेंस को बनाने में कई बाधाएं हैं, जिनमें मार्केट एंट्री और अलग-अलग देशों के नियम शामिल हैं। डोमेस्टिक मार्केट में TVS Motor और Bajaj Auto जैसी बड़ी कंपनियां लीड कर रही हैं। Ather Energy प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस कर रही है, जबकि Ola Electric ने हालिया बिक्री में गिरावट के बावजूद 10 लाख से अधिक डिलीवरी पूरी कर ली है। Ultraviolette की मौजूदा बिक्री संख्या प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में बहुत कम है, जिससे उत्पादन को कुशलतापूर्वक बढ़ाना और टिकाऊ मार्केट शेयर व मुनाफा हासिल करना जोखिम भरा हो सकता है।