भारत का भारी-भरकम लॉजिस्टिक्स सेक्टर अब तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ रहा है। UltraTech Cement और Jawaharlal Nehru Port Authority (JNPA) जैसी दिग्गज कंपनियां फाइनेंशियल ईयर 2027 तक लगभग **2,000** इलेक्ट्रिक ट्रकों को उतारने की तैयारी कर रही हैं।
भारत के लॉजिस्टिक्स सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां कंपनियां अब अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए डीजल ट्रकों की जगह इलेक्ट्रिक ट्रकों को तरजीह दे रही हैं। UltraTech Cement ने दिसंबर 2026 तक अपने बेड़े में 600 से ज्यादा भारी-भरकम इलेक्ट्रिक ट्रक शामिल करने की योजना बनाई है। इससे कंपनी सालाना 39 मिलियन लीटर डीजल की खपत कम करने और CO₂ उत्सर्जन में बड़ी कटौती करने की उम्मीद कर रही है। वहीं, JNPA भी अपने 600 ट्रकों के बेड़े में से 90% को 2026 के अंत तक इलेक्ट्रिक में बदलने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
आर्थिक चुनौतियां और लागत
ई-ट्रक की तरफ कदम बढ़ाना जितना फायदेमंद है, उतना ही खर्चीला भी। जहां एक आम डीजल ट्रक की कीमत ₹30 लाख से ₹60 लाख के बीच होती है, वहीं एक भारी-भरकम इलेक्ट्रिक ट्रक की कीमत ₹80 लाख से ₹1.1 करोड़ तक पहुंच जाती है। इसी कारण कई कंपनियां इन्हें सीधे खरीदने के बजाय लीजिंग और सब्सक्रिप्शन मॉडल पर विचार कर रही हैं।
बाजार पर असर
इस घोषणा के बाद UltraTech Cement के शेयरों में 2 सितंबर 2026 को लगभग 1.8% से 1.9% की गिरावट देखी गई। भविष्य में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये कंपनियां शुरुआती खर्च के बोझ को कम करने में सफल होती हैं और क्या इलेक्ट्रिक ट्रकों का मेंटेनेंस और फ्यूल सेविंग उन्हें लॉन्ग टर्म में फायदा दिला पाएगा।
