Tesla, GM, Toyota और Volkswagen जैसी दिग्गज ऑटो कंपनियों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से चीनी मैन्युफैक्चरर्स के खिलाफ कड़े ट्रेड बैरियर्स जारी रखने की मांग की है। US-China समिट से ठीक पहले उठाया गया यह कदम ग्लोबल ऑटो सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत दे सकता है।
दुनिया की बड़ी ऑटो कंपनियों ने व्हाइट हाउस का दरवाजा खटखटाते हुए एक साझा मांग रखी है कि चीनी व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स को अमेरिकी बाजार में एंट्री न दी जाए। यह मांग उस समय सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में चीनी कंपनियों को US में फैक्ट्री लगाने की अनुमति देने पर विचार करने के संकेत दिए थे।
क्यों चिंतित हैं दिग्गज कंपनियां?
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि चीनी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) कंपनियों के पास लागत का जबरदस्त फायदा (Cost Advantage) है। बड़ी कंपनियों को डर है कि अगर चीनी गाड़ियां अमेरिकी बाजार में आईं, तो इससे मार्केट में सप्लाई बढ़ जाएगी और उनके Profit Margins पर दबाव पड़ेगा। यह पूरा मामला अगले हफ्ते होने वाले प्रेसिडेंट ट्रम्प और शी जिनपिंग के बीच होने वाले हाई-स्टेक्स समिट से जुड़ा है, जहाँ ट्रेड पॉलिसी पर कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है।
भारतीय निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
यह खबर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत की कई ऑटो-कंपोनेंट कंपनियां ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा हैं। अगर अमेरिका अपनी पॉलिसी में बदलाव करता है या सख्त रुख अपनाता है, तो इसका असर मैन्युफैक्चरिंग हब और पार्ट्स की सोर्सिंग पर पड़ सकता है। यदि यह ट्रेड वॉर और गहराता है, तो ग्लोबल ऑटो सेक्टर की सप्लाई चेन में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है, जिस पर निवेशकों को बारीक नजर रखनी होगी।
