केंद्र सरकार की व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी लागू होने के बाद से उत्तर प्रदेश ने पुराने वाहनों को हटाने में बाज़ी मार ली है। राज्य में अब तक **1.95 लाख** से ज़्यादा गाड़ियों को डीकमीशन (decommission) किया जा चुका है। इस बड़ी उपलब्धि के पीछे राज्य में सक्रिय **50** अधिकृत रीसाइक्लिंग सेंटर (recycling center) हैं। यह सेक्टर निवेशकों के लिए खास हो सकता है, क्योंकि नई गाड़ियों की खरीद पर टैक्स छूट जैसे इंसेंटिव (incentive) इस सेक्टर को बढ़ावा दे रहे हैं।
Detailed Coverage
उत्तर प्रदेश ने स्क्रैपिंग में दर्ज की बड़ी बढ़त
भारत में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाने के राष्ट्रीय अभियान में उत्तर प्रदेश सबसे आगे निकल गया है। 30 जून 2026 तक, राज्य ने 1.85 लाख से ज़्यादा प्राइवेट गाड़ियों और लगभग 10,000 सरकारी वाहनों के निपटान का सफलतापूर्वक काम पूरा कर लिया है। इस पूरे काम में राज्य के 101 रजिस्टर्ड स्क्रैपिंग फैसिलिटी (scrapping facility) का नेटवर्क मददगार साबित हुआ है, जिनमें से 50 सेंटर फिलहाल पूरी तरह से चालू हैं।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्रव्यापी प्रगति
वाहनों को डीकमीशन करने की यह पूरी प्रक्रिया केंद्र सरकार के 'वाहन' (Vahan) सिस्टम और रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज मिनिस्ट्री (Ministry of Road Transport and Highways) द्वारा मैनेज किए जाने वाले राष्ट्रीय व्हीकल-स्क्रैप पोर्टल (Vehicle-Scrap Portal) के साथ इंटीग्रेट (integrate) है। यह डिजिटल ढांचा पारदर्शिता सुनिश्चित करने और गाड़ी मालिकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बनाया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर, अगस्त 2022 में पॉलिसी शुरू होने के बाद से कुल 4.20 लाख से ज़्यादा गाड़ियों को स्क्रैप किया जा चुका है, जो इस सेक्टर में बढ़ते रुझान का संकेत है। 1 जनवरी से 27 जुलाई 2026 के बीच, देश भर के अधिकृत सेंटरों ने 1.82 लाख से ज़्यादा एप्लीकेशन्स (applications) को प्रोसेस किया है।
आर्थिक इंसेंटिव्स और मार्केट पर असर
सरकार ने स्क्रैपेज प्रोग्राम में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए खास आर्थिक फायदे भी पेश किए हैं। पुराने वाहन जमा कराने वाले मालिकों को 'सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट' (Certificate of Deposit) मिलता है। यह सर्टिफिकेट काफी कीमती है क्योंकि नई गाड़ी खरीदते समय प्राइवेट वाहनों पर 15% तक और कमर्शियल वाहनों पर 10% तक रोड टैक्स में छूट का फायदा मिलता है। सबसे खास बात यह है कि इस सर्टिफिकेट को ट्रांसफर (transfer) भी किया जा सकता है, जिससे एक सेकेंडरी मार्केट (secondary market) बनता है जहाँ मालिक तुरंत नई गाड़ी खरीदने के मूड में नहीं होने पर अपनी क्रेडिट बेच सकते हैं।
इन सीधे फायदों के अलावा, राज्य का वैज्ञानिक तरीके से मेटल और कंपोनेंट्स (components) की रीसाइक्लिंग (recycling) पर ध्यान देना सर्कुलर इकोनॉमी (circular economy) में नए अवसर पैदा कर रहा है। दिल्ली EV पॉलिसी 2026 जैसे क्षेत्रीय प्रयासों से भी इस बदलाव को बल मिल रहा है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) पर स्विच करने वालों के लिए ₹1 लाख तक का इंसेंटिव देती है। जैसे-जैसे यह इकोसिस्टम (ecosystem) परिपक्व होगा, स्टेकहोल्डर्स (stakeholders) का फोकस कंज्यूमर अवेयरनेस (consumer awareness) बढ़ाने और मैटेरियल रिकवरी (material recovery) की आर्थिक एफिशिएंसी (efficiency) को ऑप्टिमाइज़ (optimize) करने पर बढ़ सकता है। इन सेंटरों की स्केलेबिलिटी (scalability) और ऑटोमोटिव वैल्यू चेन (automotive value chain) के साथ इनका इंटीग्रेशन, घरेलू ऑटो डिमांड और रीसाइक्लिंग इंडस्ट्री पर लंबे समय तक पड़ने वाले असर पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए अहम क्षेत्र बने रहेंगे।
