15 जुलाई से यूके (UK) से आने वाली लग्जरी कारों पर इम्पोर्ट ड्यूटी (Import Duty) 110% से घटकर 30% हो गई है। इस ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) का फायदा Rolls-Royce, Aston Martin और Jaguar Land Rover जैसी कंपनियों को मिलेगा, जिससे इन कारों की कीमतें 20% से 25% तक कम हो सकती हैं। वहीं, डोमेस्टिक EV मेकर्स (EV Makers) को 5 साल की सुरक्षा मिलेगी।
भारत और यूके (UK) के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement) आज, 15 जुलाई से लागू हो गया है। इस समझौते के तहत, यूके (UK) से आयातित लग्जरी कारों पर लगने वाले कस्टम ड्यूटी (Customs Duty) में भारी कटौती की गई है। पहले जहां यह ड्यूटी 110% थी, वहीं अब यह घटकर 30% हो गई है।
इस बड़े बदलाव का सीधा असर Rolls-Royce, Aston Martin, McLaren और Jaguar Land Rover जैसे प्रीमियम कार ब्रांड्स पर पड़ेगा। अनुमान है कि इन शानदार कारों की कीमतों में 20% से लेकर 25% तक की कमी आ सकती है।
इम्पोर्ट कोटा और लंबी अवधि में ड्यूटी में कमी
हालांकि, यह ड्यूटी कट (Duty Cut) तुरंत लागू हो गई है, लेकिन यह टैरिफ रेट कोटा (Tariff Rate Quota) सिस्टम के तहत नियंत्रित होगी। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (Directorate General of Foreign Trade) ने शुरुआत में 10,000 पेट्रोल और डीजल पैसेंजर व्हीकल्स (Passenger Vehicles) के लिए यह नई 30% ड्यूटी दर तय की है। यह कोटा सिस्टम लग्जरी व्हीकल्स के आयात को मैनेज करने के लिए है। साथ ही, आने वाले 15 सालों में यह ड्यूटी घटकर 10% तक पहुँच जाएगी, जिससे इम्पोर्ट करने वाली कंपनियों को अपनी प्लानिंग करने का मौका मिलेगा।
इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric Vehicles) के लिए सुरक्षा
इस समझौते में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric Vehicles) को लेकर एक खास बात है। यूके (UK) से आने वाले इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (Electric Vehicles) को ट्रेड एग्रीमेंट के पांचवें साल तक इस कंसेशनल ड्यूटी का फायदा नहीं मिलेगा। यह 5 साल की मोहलत भारतीय इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने वाली कंपनियों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी, जिससे उन्हें अपने प्रोडक्शन को बढ़ाने और मार्केट में कॉम्पिटिशन के लिए तैयार होने का समय मिलेगा।
लग्जरी कार मार्केट पर असर
लग्जरी कार बनाने वाली कंपनियों और डीलर्स के लिए यह एक बड़ा डेवलपमेंट है। Jaguar Land Rover जैसी कंपनियों ने पहले ही Range Rover Sport SV और Range Rover SV जैसे हाई-एंड मॉडल्स की कीमतों को एडजस्ट करना शुरू कर दिया है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव से इम्पोर्टेड लग्जरी कार्स का मार्केट शेयर बढ़ेगा। Jaguar Land Rover का अनुमान है कि उनकी कुल बिक्री में इम्पोर्टेड कारों का हिस्सा मौजूदा 3% से 4% से बढ़कर 7% से 10% तक पहुंच सकता है।
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि भले ही इस समझौते का मकसद लग्जरी सेगमेंट में डिमांड बढ़ाना है, लेकिन कंपनियों को असली फायदा कंज्यूमर डिमांड, कोटा सिस्टम की एफिशिएंसी और लग्जरी ब्रांड्स द्वारा अपनी सप्लाई चेन को मैनेज करने पर निर्भर करेगा। आने वाली तिमाहियों में इम्पोर्ट वॉल्यूम (Import Volume) पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
