ब्रिटिश कार निर्माताओं के लिए भारत में इंपोर्ट ड्यूटी में छूट का रास्ता खुल गया है। भारत सरकार ने नए इंडिया-UK ट्रेड एग्रीमेंट के तहत एक खास एप्लीकेशन विंडो खोली है, जो 4 अगस्त तक खुली रहेगी। इस डील से लग्जरी और कुछ कमर्शियल वाहनों पर टैरिफ कम होगा, लेकिन घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक और बजट कारों को शुरुआती 5 सालों के लिए बाहर रखा गया है।
4 अगस्त तक करें अप्लाई
भारत के डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने ब्रिटिश कार कंपनियों के लिए इंडिया-UK कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के तहत इंपोर्ट ड्यूटी में छूट के लिए एप्लीकेशन विंडो खोल दी है। यह विंडो 15 जुलाई 2026 से शुरू होकर 4 अगस्त 2026 तक खुली रहेगी। इस फ्रेमवर्क के तहत, चुनिंदा UK-निर्मित गाड़ियों को तय कोटे (TRQ - Tariff Rate Quotas) के अंदर कम इंपोर्ट ड्यूटी पर भारत में लाया जा सकेगा।
यह सिस्टम मार्केट में नियंत्रित एक्सेस सुनिश्चित करता है। जैसे ही तय संख्या में गाड़ियां इस कोटे के तहत आ जाएंगी, उसके बाद आने वाली किसी भी गाड़ी पर सामान्य, ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी लागू होगी।
लग्जरी सेगमेंट को फायदा, आम कारें सुरक्षित
यह डील इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) पैसेंजर कार्स के लिए इंपोर्ट टैरिफ में चरणबद्ध कटौती का प्रावधान करती है। फिलहाल यह ड्यूटी 110% तक है, जो 15 सालों में घटकर 10% हो जाएगी। पहले साल के लिए, पॉलिसी इंजन साइज के आधार पर खास कैटेगरी बनाती है। बड़ी इंजन वाली गाड़ियों के लिए ड्यूटी 110% से घटकर 30% हो जाएगी, जिसके लिए 10,000 यूनिट का कोटा है। छोटी और मिड-रेंज इंजन वाली गाड़ियों के लिए ड्यूटी 66% से घटकर 50% होगी, जिसके लिए 5,000 यूनिट का कोटा तय किया गया है।
इस कदम से Jaguar Land Rover, Aston Martin, Bentley, McLaren और Rolls-Royce जैसी प्रीमियम और लग्जरी ब्रांड्स को सीधे फायदा होने की उम्मीद है। इन हाई-एंड व्हीकल्स की एंट्री कॉस्ट कम होने से ये भारतीय खरीदारों के लिए ज्यादा किफायती हो जाएंगी। वहीं, लोकल ऑटो इंडस्ट्री को बचाने के लिए, सरकार ने शुरुआती 5 सालों के लिए £40,000 से कम कीमत वाली मास-मार्केट इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को ड्यूटी छूट से बाहर रखा है।
लंबी अवधि की योजना
यह कोटा सिस्टम धीरे-धीरे ट्रांजिशन प्रदान करेगा। ICE वाहनों के लिए इम्पोर्ट वॉल्यूम पांचवें साल तक बढ़ेगा और फिर धीरे-धीरे कम होने लगेगा। 15वें साल तक, सभी योग्य UK-निर्मित ICE वाहनों के लिए ड्यूटी 10% पर स्थिर होने का लक्ष्य है।
छठे साल से, प्रीमियम इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन-पावर्ड वाहनों के लिए भी एक खास स्ट्रक्चर लागू होगा, जिनकी ड्यूटी 10वें साल तक 10% तक पहुंचने का लक्ष्य है। इन फायदों के लिए, इम्पोर्टर्स को UK अथॉरिटीज द्वारा जारी एक वैलिड सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin) दिखाना होगा, जो यह साबित करेगा कि गाड़ी UK में ही बनी है।
