Tesla ने भारत में अपने पहले साल में 500 से भी कम Model Y SUV बेची हैं। यह लग्जरी कार सेगमेंट में BMW और Mercedes-Benz जैसे दिग्गजों से काफी पीछे है। इम्पोर्ट ड्यूटी और सीमित मॉडल्स ने कंपनी की राह मुश्किल कर दी है।
भारत में Tesla की एंट्री में आईं बड़ी मुश्किलें
Tesla के लिए भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट में पहले साल की शुरुआत काफी चुनौतीपूर्ण रही है। सितंबर 2025 से जून 2026 के बीच, कंपनी ने अपनी Model Y SUV की 500 से भी कम यूनिट्स बेची हैं। यह दिखाता है कि बिना लोकल मैन्युफैक्चरिंग या सर्विस नेटवर्क के भारत जैसे प्रीमियम ऑटोमोटिव ब्रांड के लिए जगह बनाना कितना मुश्किल है।
लग्जरी कार कंपनियों से सीधी टक्कर
Tesla के इन आंकड़ों की तुलना अगर भारत में स्थापित लग्जरी कार कंपनियों से की जाए, तो तस्वीर साफ हो जाती है। इसी 9 महीने की अवधि में, BMW ने जहां 3,433 गाड़ियां बेचीं, वहीं Mercedes-Benz ने 1,116 यूनिट्स की बिक्री की। BMW ने तो कई महीनों में Tesla की पूरे साल की बिक्री से ज्यादा कारें बेच दीं। इतना ही नहीं, चीनी इलेक्ट्रिक कार निर्माता BYD ने भी भारत में अच्छी बिक्री दर्ज की है, जिसकी एक वजह उनके अलग-अलग प्राइस पॉइंट पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की विस्तृत रेंज है।
इम्पोर्ट ड्यूटी का भारी बोझ
Tesla की कम बिक्री का एक बड़ा कारण यह है कि वह 'कम्प्लीटली बिल्ट यूनिट' (CBU) के तौर पर भारत में गाड़ियां इम्पोर्ट करती है। इस वजह से उस पर 100% से 110% तक की भारी इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है। इस टैक्स स्ट्रक्चर के चलते Model Y की लॉन्चिंग कीमत ₹59.89 लाख थी, जिसे बाद में घटाकर ₹50.89 लाख किया गया।
इस प्राइस रेंज में Model Y सीधे तौर पर यूरोपियन कंपनियों की लग्जरी सेडान और SUV से मुकाबला करती है। इन कंपनियों ने जहां भारत में सालों से सर्विस सेंटर, स्पेयर पार्ट्स सप्लाई चेन और बड़े डीलरशिप नेटवर्क में भारी निवेश किया है, वहीं Tesla के पास फिलहाल सिर्फ पांच एक्सपीरियंस सेंटर हैं। इससे संभावित खरीदारों की पहुंच सीमित हो जाती है, जो आफ्टर-सेल्स सपोर्ट को प्राथमिकता देते हैं।
भविष्य की चुनौतियां और उम्मीदें
ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि Tesla की 'वन-मॉडल' स्ट्रैटेजी भारतीय लग्जरी मार्केट के एक छोटे से हिस्से को ही लुभा पाती है। Tesla की ब्रांड वैल्यू भले ही बहुत ज्यादा हो, लेकिन कंपनी अभी तक सेडान या छोटी SUV जैसे बॉडी स्टाइल की वैरायटी नहीं दे पाई है, जिसे भारतीय खरीदार प्रीमियम ब्रांड चुनते समय देखते हैं।
Tesla के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी कॉस्ट स्ट्रक्चर है। अगर कंपनी भारत में लोकल असेंबली या मैन्युफैक्चरिंग प्लांट नहीं लगाती है, तो उसकी गाड़ियों की कीमतें मौजूदा लग्जरी ब्रांड्स की तुलना में ज्यादा ही रहेंगी। निवेशकों और बाजार पर नजर रखने वालों के लिए, यह देखना अहम होगा कि क्या Tesla भारत में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की घोषणा करती है या अपने लोकल प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार करती है, जो लागत कम करने और ग्राहक आधार बढ़ाने के लिए जरूरी होगा।
