भारत में Tesla की Model Y की लॉन्चिंग में आई बाधाएं
Tesla की भारत में महत्वाकांक्षी शुरुआत को बड़ा झटका लगा है। कंपनी की Model Y SUV की करीब 100 से 150 यूनिट्स की बुकिंग ग्राहकों द्वारा रद्द कर दी गई है। यह स्थिति दर्शाती है कि भारतीय बाज़ार कीमत को लेकर कितना संवेदनशील है। इस चुनौती से निपटने के लिए, Tesla ने अपनी चुनिंदा Model Y वेरिएंट्स पर ₹2 लाख तक का डिस्काउंट पेश किया है। कंपनी ने छह-सीटर Model Y L को ₹61.99 लाख (एक्स-शोरूम) में लॉन्च किया है, ताकि अधिक ग्राहकों को आकर्षित कर सके। लेकिन, यह कार सीधे तौर पर Mercedes-Benz के CLA BEV से टक्कर लेगी, जिसकी शुरुआती कीमत ₹55 लाख है और जिसके 400 से ज्यादा प्री-बुकिंग हो चुकी हैं। वहीं, BMW की iX1 इलेक्ट्रिक SUV भी ₹51.40 लाख के आसपास की कीमत पर अच्छी डिमांड में है।
कॉम्पिटिशन में पीछे, बिक्री के आंकड़े चिंताजनक
Tesla अपने प्रतिद्वंद्वियों से कीमत और वैल्यू के मामले में पिछड़ रही है। जहां Tesla ने Model Y RWD को ₹59.89 लाख और Long Range RWD को ₹67.89 लाख में लॉन्च किया, वहीं मार्केट में कम्पटीशन और कड़ा हो गया है। BMW की iX1 काफी कम कीमत पर उपलब्ध है और इसकी अच्छी-खासी डिमांड है। BMW EV सेगमेंट में 70% से ज्यादा मार्केट शेयर रखती है, जो कि Q1 2026 में 1,185 EV बेचकर हासिल किया है। Mercedes-Benz ने भी ₹55 लाख से ₹64 लाख के बीच अपनी CLA BEV रेंज पेश कर आक्रामक रणनीति अपनाई है। भारत में पैसेंजर EV की खुदरा बिक्री 2025 में 77% बढ़कर 1,76,817 यूनिट्स हो गई। BYD जैसी कंपनियां 2025 में लगभग 6,000 यूनिट्स बेच चुकी हैं और 2026 में डबल डिजिट ग्रोथ का लक्ष्य रखती हैं। Tesla ने 2025 में Model Y की केवल 225 यूनिट्स बेचीं, जो स्थापित ब्रांड्स और वैल्यू-फोक्स्ड कंपटीटर्स के मुकाबले काफी कम है।
स्ट्रक्चरल हर्डल्स: ड्यूटी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी नीतियां
Tesla को भारत में सिर्फ प्रोडक्ट से जुड़ी ही नहीं, बल्कि कुछ बड़े स्ट्रक्चरल हर्डल्स का भी सामना करना पड़ रहा है। पूरी तरह से बनी-बनाई गाड़ियों (CBUs) पर 100% तक की भारी इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) कीमतों को बढ़ा देती है। इसके अलावा, भारत में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (Charging Infrastructure) का धीमा विकास और सीमित सर्विस नेटवर्क ग्राहकों के भरोसे को प्रभावित कर रहा है। BMW और Mercedes-Benz जैसी कंपनियां पहले से ही बड़े सेल्स और सर्विस नेटवर्क के साथ मौजूद हैं। सरकार की नई EV पॉलिसी (SPMEPCI) के तहत, इंपोर्ट ड्यूटी में छूट के लिए ₹4,150 करोड़ का भारी लोकल इन्वेस्टमेंट जरूरी है, जिसे Tesla ने अभी तक नहीं अपनाया है। इस पॉलिसी की वजह से Volkswagen, Kia, Hyundai जैसी कंपनियां लोकल मैन्युफैक्चरिंग के लिए आगे आ रही हैं, जिससे उन्हें इंपोर्टेड मॉडल्स पर कॉस्ट एडवांटेज मिलेगा। भारत-यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भी यूरोपियन EVs पर इंपोर्ट ड्यूटी को 10-15% तक कम कर सकता है, जिससे कम्पटीशन और बढ़ेगा। Tesla की मौजूदा हाई-प्राइस, लो-वॉल्यूम स्ट्रैटेजी भारतीय मार्केट की वैल्यू-फॉर-मनी डिमांड से मेल नहीं खा रही।
लंबी अवधि की स्ट्रैटेजी पर तत्काल दबाव
Tesla India के हेड, Sharad Aggarwal, का कहना है कि कंपनी की लंबी अवधि की स्ट्रैटेजी है और वह तत्काल बिक्री पर ध्यान नहीं दे रही। हालांकि, प्रतिद्वंद्वी कंपनियां तेजी से अपने EV पोर्टफोलियो और मार्केट शेयर का विस्तार कर रही हैं, और सरकारी नीतियां भी लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रही हैं। BMW लक्जरी EV सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है और Mercedes-Benz भी अपने इलेक्ट्रिक ऑफर्स बढ़ा रही है। ऐसे में, प्राइस-सेंसिटिव भारतीय मार्केट में Tesla की पोजीशन अभी भी अनिश्चित लग रही है। नई Model Y L की सफलता यह तय करेगी कि क्या कंपनी अपनी ग्लोबल प्रीमियम अपील से परे, लोकल मार्केट की डिमांड को समझ पाती है।
