चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर Tesla का फोकस
Tesla India के जनरल मैनेजर शरद अग्रवाल ने बताया है कि कंपनी दिल्ली, चंडीगढ़, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, मुंबई और पुणे जैसे प्रमुख शहरों में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर जोर दे रही है। इस पहल का मुख्य मकसद ग्राहकों की 'रेंज एंजाइटी' (Range Anxiety) को दूर करना है, जो भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने वाले कई लोगों के लिए एक बड़ी चिंता है। Tesla सुपरचार्जर (Superchargers) और डेस्टिनेशन चार्जर (Destination Chargers) लगा रही है, साथ ही नए एक्सपीरियंस और सर्विस सेंटर भी खोल रही है। यह विस्तार Tesla की भारतीय बाजार के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
ग्लोबल मॉडल को दोहराने की कोशिश
दुनिया भर में Tesla के 8,100 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन और 80,000 से अधिक सुपरचार्जर हैं, जिनका अपटाइम (Uptime) 99.95% है। कंपनी यही ग्लोबल स्टैंडर्ड भारत में भी लाना चाहती है, जिसके लिए भारी कैपिटल इन्वेस्टमेंट (Capital Investment) की जरूरत होगी। Tesla अब तक भारत में पांच चार्जिंग स्टेशन लगा चुकी है और आगे और भी स्टेशंस बनाने की योजना है। ऐसे में Tesla के करीब $1.4 ट्रिलियन वैल्यू वाले स्टॉक पर निवेशकों की नजर रहेगी, खासकर इस बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश पर।
भारतीय EV मार्केट की असलियत
Tesla की यह रणनीति ऐसे समय में आ रही है जब भारतीय EV मार्केट तेजी से बदल रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY2026) में EV रिटेल सेल्स 83.63% बढ़कर लगभग 2 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। हालांकि, पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में EV की पैठ (Penetration) अभी भी काफी कम, करीब 4.2% है। भारत में Tata Motors जैसी लोकल कंपनियां मार्केट में राज कर रही हैं। Tata Motors ने FY2026 में 78,811 EV बेचीं, MG Motor ने 53,089 यूनिट्स और Mahindra ने 42,721 यूनिट्स बेचीं। इन कंपनियों का मार्केट शेयर 87.3% है। BYD जैसी कंपनियों ने 2025 में 6,000 कारें बेचीं और 84% की ग्रोथ दर्ज की।
कीमत और इंपोर्ट ड्यूटी की मार
Tesla का Model Y भारत में लगभग ₹61.99 लाख (लगभग $66,000) से शुरू होता है। यह कीमत लोकल मार्केट के हिसाब से बहुत ज्यादा है, खासकर Tata, MG और Mahindra के मॉडल्स की तुलना में। भारत में करीब 100% इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) के कारण Tesla के व्हीकल्स और भी महंगे हो जाते हैं। चीन में Model Y की कीमत करीब $49,700 थी, जबकि भारत में यह $66,000 के करीब है। Tesla का डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (Direct-to-Consumer) मॉडल लोकल डीलरों के नेटवर्क के मुकाबले कमजोर पड़ सकता है।
आगे की राह और प्रॉफिटेबिलिटी पर सवाल
Tesla का चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश एक लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजी (Long-term Strategy) है। लेकिन, इतने बड़े निवेश की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को लेकर अभी सवाल बने हुए हैं। कंपनी के पास फिलहाल भारत के EV मार्केट का सिर्फ 0.17% शेयर है (मार्च 2026 तक लगभग 340-350 Model Y यूनिट्स की बिक्री)। भारत सरकार की PM E-DRIVE जैसी योजनाओं से चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन Tesla को अपनी कीमत नीति (Pricing Strategy) को लोकल एफोर्डेबिलिटी (Affordability) के हिसाब से ढालना होगा और लोकल कंपनियों से कड़ा मुकाबला करना होगा।
