Tata Motors अपने EV सेगमेंट में बैटरी की सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतों को इस तिमाही के अंत तक सुलझाने की तैयारी में है। Q1 में **3,400** से ज्यादा इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियों के भारी ऑर्डर के बीच, कंपनी ने बढ़ती इनपुट लागत को देखते हुए **₹25,000** तक प्राइस हाइक का ऐलान किया है, जो **1 सितंबर, 2026** से लागू होगा।
सप्लाई चेन का समाधान और बढ़ती डिमांड
Tata Motors फिलहाल बैटरी सेल की भारी किल्लत से जूझ रही है, जिसकी मुख्य वजह चीन से सप्लाई में आ रही रुकावटें हैं। हालांकि, कंपनी ने अब बड़े प्रोक्योरमेंट ऑर्डर सुरक्षित कर लिए हैं ताकि इलेक्ट्रिक कमर्शियल गाड़ियों की डिलीवरी पेंडिंग न रहे। पहली तिमाही में 3,400 से अधिक ऑर्डर मिलना इस बात का सबूत है कि बाजार में इनके इलेक्ट्रिक पोर्टफोलियो की डिमांड काफी मजबूत है।
मार्जिन बचाने के लिए प्राइस हाइक
कंपनी के इंट्रा (Intra) और ऐस प्रो (Ace Pro) जैसे छोटे इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहन अब डीजल और पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले काफी किफायती साबित हो रहे हैं, जिससे फ्लीट ऑपरेटर्स का रुझान इनकी तरफ बढ़ा है। लेकिन कमोडिटी की कीमतों में उछाल और इनपुट इन्फ्लेशन के कारण कंपनी ने अपने मार्जिन को सुरक्षित करने के लिए गाड़ियों की कीमतों में ₹25,000 तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। यह नई दरें 1 सितंबर, 2026 से प्रभावी होंगी।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर बड़ा दांव
Tata Group की बैटरी यूनिट 'Agratas' के जरिए कंपनी अब विदेशी सप्लायर्स पर निर्भरता खत्म करने की कोशिश कर रही है। भविष्य में लिथियम-आयन सेल का लोकल प्रोडक्शन न केवल लागत कम करेगा, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में होने वाली उठापटक से भी सुरक्षा देगा। इसके अलावा, कंपनी PM-eBus Sewa जैसी सरकारी स्कीमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि सप्लाई चेन सामान्य होने के बाद कंपनी कितनी तेजी से अपना बैककॉल पूरा करती है। वहीं, बढ़ी हुई कीमतें डिमांड पर कितना असर डालती हैं और Agratas का लोकल प्लांट कितनी जल्दी ऑपरेशनल होता है, यह लंबी अवधि के लिए कंपनी के मार्जिन और मुनाफे को तय करेगा।
