Tata Group ने अपने ऑटोमोटिव बिजनेस के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का खुलासा किया है, जिसका लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2031 तक **$100 अरब** का संयुक्त वार्षिक टर्नओवर हासिल करना है। इस लक्ष्य को Jaguar Land Rover (JLR) और घरेलू पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट के विस्तार से हासिल करने की उम्मीद है।
रेवेन्यू बढ़ाने का रोडमैप
Tata Group के मैनेजमेंट के अनुसार, JLR इस रेवेन्यू लक्ष्य में बड़ा योगदान देगा, जिसका टारगेट $45 अरब से $50 अरब के बीच रखा गया है। वहीं, घरेलू पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट से लगभग $15 अरब और बाकी हिस्सा कमर्शियल व्हीकल बिजनेस से आने की उम्मीद है। Tata Motors Passenger Vehicles अगले पांच सालों में सेल्स वॉल्यूम में 15% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल करने का लक्ष्य बना रहा है।
₹40,000 करोड़ का भारी निवेश
इस विस्तार योजना को सपोर्ट करने के लिए कंपनी ₹40,000 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) करेगी। इस निवेश का एक बड़ा हिस्सा छह नए व्हीकल मॉडल लॉन्च करने और 20 से अधिक मौजूदा मॉडलों को अपडेट करने पर खर्च होगा। कंपनी का कहना है कि इस बढ़ी हुई प्रोडक्शन कैपेसिटी को मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में ही मैनेज किया जाएगा। Tata Motors के मुख्य प्रोडक्शन प्लांट्स Sanand, Ranjangaon और Panapakkam में स्थित हैं।
मार्केट शेयर बढ़ाने की कवायद
फिलहाल घरेलू पैसेंजर व्हीकल मार्केट में लगभग 14% शेयर रखने वाली Tata Motors इसे 20% से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रखती है। भारत का पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट काफी कॉम्पिटिटिव (Competitive) है, जहाँ Maruti Suzuki और Hyundai जैसी कंपनियां बड़ा मार्केट शेयर रखती हैं। इस ग्रोथ को हासिल करने के लिए कंपनी को अपने ICE (Internal Combustion Engine) और EV (Electric Vehicle) दोनों सेगमेंट में प्रोडक्ट अपील बनाए रखनी होगी, जिसमें Tata Motors पहले से ही एक बड़ा प्लेयर है।
निवेशकों के लिए खास बातें
निवेशकों को इस रणनीति की सफलता के लिए कुछ प्रमुख फैक्टर्स पर नजर रखनी होगी। इसमें नए प्रोडक्ट लॉन्च का समय पर एग्जीक्यूशन, भारी प्रतिस्पर्धा के बीच प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखना और इस ग्रोथ के लिए जरूरी डेट (Debt) को मैनेज करना शामिल है। JLR के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ा होने के कारण, कंपनी का प्रदर्शन ग्लोबल डिमांड और प्रमुख एक्सपोर्ट रीजन्स की इकोनॉमिक कंडिशन्स पर भी निर्भर करेगा। निवेशकों को ₹40,000 करोड़ के निवेश की प्रगति, नए व्हीकल लॉन्च की अपडेट्स और प्रॉफिटेबिलिटी से समझौता किए बिना डोमेस्टिक मार्केट शेयर में ग्रोथ बनाए रखने की कंपनी की क्षमता पर नजर रखनी चाहिए।
