Tata Motors ने Iveco Group में **89.42%** हिस्सेदारी का अधिग्रहण **€3.43 बिलियन** में पूरा कर लिया है। कंपनी ने अब अगले 5 वर्षों में **6,00,000** सालाना गाड़ियों की बिक्री का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
ग्लोबल मार्केट में बड़ी छलांग
इस अधिग्रहण के साथ ही Tata Motors अब 6 टन से अधिक वजन वाले ट्रकों की दुनिया की चौथी सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरर बन गई है। कंपनी का विजन केवल 6,00,000 यूनिट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबी अवधि में इसे 10 लाख के पार ले जाने की योजना है। इस डील के जरिए कंपनी अब Iveco के FPT इंडस्ट्रियल डिवीजन का इस्तेमाल करेगी, जो कंस्ट्रक्शन और मरीन सेगमेंट में बेहतरीन तकनीक मुहैया कराता है।
भारत के लिए क्या है खास प्लान?
भारतीय बाजार में कंपनी सीधे पूरा मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के बजाय 'सेमी-नॉकड-डाउन' (SKD) असेंबली मॉडल अपनाएगी। इसके पीछे तर्क यह है कि पहले डिमांड को परखा जाए और भारी कैपिटल खर्च से बचा जाए। N. Chandrasekaran, जिन्हें Iveco Group का चेयरमैन नियुक्त किया गया है, उनका मानना है कि यह स्ट्रैटेजी मुनाफे के मार्जिन को बढ़ाने में मदद करेगी।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और रिस्क
हालांकि यह डील बड़ी है, लेकिन इसके साथ कुछ रिस्क भी जुड़े हैं:
- कर्ज का दबाव: €3.43 बिलियन की बड़ी डील कंपनी की बैलेंस शीट पर भारी पड़ सकती है और शॉर्ट टर्म में डेट बढ़ सकता है।
- ऑपरेशनल चैलेंज: दो अलग-अलग कॉर्पोरेट कल्चर को एक साथ जोड़ना एक बड़ी चुनौती होगी।
- एग्जीक्यूशन रिस्क: भारत में मैन्युफैक्चरिंग को पूरी तरह लोकल बनाने में देरी या लागत बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
निवेशकों की नजरें अब 6 नवंबर, 2026 तक चलने वाले 'वॉलंटरी टेंडर ऑफर' और उसके बाद 13 नवंबर, 2026 को होने वाले सेटलमेंट पर टिकी होंगी।
