Tata Motors भारतीय पैसेंजर व्हीकल मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर **14.2%** से **20%** तक ले जाने की तैयारी में है। कंपनी ऑपरेशंस को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारी निवेश कर रही है, साथ ही Jaguar Land Rover (JLR) की सप्लाई चेन की दिक्कतों से भी निपट रही है।
Tata Motors का महत्वाकांक्षी प्लान
Tata Motors ने भारतीय पैसेंजर व्हीकल (PV) मार्केट में 20% की हिस्सेदारी हासिल करने का एक बड़ा रोडमैप तैयार किया है। यह लक्ष्य कंपनी के मौजूदा 14.2% मार्केट शेयर से काफी ऊपर है। कंपनी के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने बताया कि ग्रोथ का अगला चरण AI को कंपनी के हर हिस्से में इंटीग्रेट करने से आएगा, चाहे वो मैन्युफैक्चरिंग हो, सप्लाई चेन मैनेजमेंट हो या कस्टमर सर्विस।
ऐतिहासिक ग्रोथ और सेगमेंट परफॉर्मेंस
पिछले 6 सालों में, Tata Motors ने अपनी मार्केट प्रेजेंस को जबरदस्त तरीके से बढ़ाया है, मार्केट शेयर 4.2% से बढ़कर 14.2% हो गया है। कंपनी की टोटल सेल्स 5 गुना और रेवेन्यू 6 गुना बढ़ गया है, खासकर प्री-पैंडेमिक लेवल के मुकाबले। इस ग्रोथ में SUV सेगमेंट, जैसे Nexon और Punch, और CNG कैटेगरी का बड़ा योगदान है, जो इंडस्ट्री ग्रोथ रेट से भी आगे चल रहा है।
Jaguar Land Rover (JLR) की मुश्किलें
घरेलू पैसेंजर व्हीकल बिजनेस के विस्तार के साथ-साथ, कंपनी अपनी लग्जरी सब्सिडियरी Jaguar Land Rover (JLR) के सामने आने वाली मुश्किलों से भी जूझ रही है। ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों और मध्य-पूर्व में अस्थिरता के चलते JLR के वॉल्यूम पर काफी दबाव देखा गया। इतना ही नहीं, एक साइबर इंसिडेंट के कारण JLR का प्रोडक्शन करीब 2 महीने तक रुका रहा, जिसका असर कंपनी की परफॉर्मेंस पर पड़ा। निवेशक अब FY27 के दूसरी छमाही में JLR के नए मॉडल्स के लॉन्च पर नजर रखे हुए हैं, कि क्या ये नए प्रोडक्ट्स हाल की प्रोडक्शन वोलेटिलिटी की भरपाई कर पाएंगे।
स्ट्रैटेजिक रीस्ट्रक्चरिंग
Tata Motors ने Financial Year 2026 में अपने पैसेंजर व्हीकल बिजनेस के डी-मर्जर (Demerger) को पूरा करके एक अहम मुकाम हासिल किया है। इस रीस्ट्रक्चरिंग का मकसद अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स को ज्यादा फोकस देना है, जिससे PV यूनिट अपने कैपिटल एलोकेशन और टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट को और इंडिपेंडेंटली मैनेज कर सके। कंपनी अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट को भी बढ़ा रही है, जिसकी एवरेज मंथली सेल्स करीब 15,000 यूनिट्स है। AI-ड्रिवन एफिशिएंसी मेजर्स और ग्लोबल सप्लाई चेन की स्टेबिलिटी कंपनी के लिए बड़े मॉनिटरिंग पॉइंट्स होंगे। इन सब के बीच, कंपनी की मार्केट शेयर में बढ़त बनाए रखने की क्षमता, इंटरनेशनल लॉजिस्टिक्स को मैनेज करने और EV व ICE (Internal Combustion Engine) मार्केट्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा पर निर्भर करेगी।
