Tata Motors Passenger Vehicles ने प्रोडक्शन बढ़ाने की बड़ी तैयारी कर ली है। कंपनी FY28 तक अपनी मंथली कैपेसिटी को 1 लाख यूनिट तक ले जाने और 2031 तक मार्केट शेयर को 20% तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए कंपनी **₹40,000 करोड़** का भारी-भरकम निवेश करने जा रही है ताकि सप्लाई चेन की बाधाओं को दूर किया जा सके।
लक्ष्य: 1 लाख का आंकड़ा
फिलहाल Tata Motors की मंथली प्रोडक्शन क्षमता करीब 75,000 यूनिट्स के आसपास है, लेकिन बिक्री औसतन 65,000 यूनिट्स पर सिमट जाती है। कंपनी के मैनेजमेंट ने माना है कि सप्लायर लेवल पर आ रही दिक्कतें ही इस अंतर की मुख्य वजह हैं। इस नई योजना के जरिए कंपनी दशक के अंत तक 12 लाख से ज्यादा गाड़ियों की सालाना बिक्री और घरेलू पैसेंजर व्हीकल मार्केट में 20% हिस्सेदारी हासिल करना चाहती है।
निवेश और भविष्य की राह
इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य के लिए कंपनी FY27 से FY31 के बीच ₹37,500 करोड़ से ₹40,000 करोड़ खर्च करेगी। इस फंड का इस्तेमाल नए मॉडल्स के डेवलपमेंट और कैपेसिटी बढ़ाने में होगा। कंपनी के पाइपलाइन में 6 नए मॉडल्स हैं, जिसमें नई जनरेशन की Nexon और Avinya आर्किटेक्चर शामिल हैं।
रिस्क और निवेशकों के लिए सुझाव
इस भारी निवेश के साथ कुछ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। पूरी योजना सप्लायर्स की क्षमता पर टिकी है। अगर वेंडर लेवल पर कोई देरी या समस्या आती है, तो कंपनी का ग्रोथ प्लान प्रभावित हो सकता है। साथ ही, भारतीय ऑटो मार्केट में कड़ा कॉम्पिटिशन भी एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों को कंपनी की अगली तिमाही की रिपोर्ट्स पर नजर रखनी चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि वे प्रोडक्शन और बिक्री के बीच के अंतर को कम करने में कितने सफल हो रहे हैं और मार्जिन पर इसका क्या असर पड़ रहा है।
