Tata Motors के तिमाही नतीजों में रेवेन्यू **₹23,930 करोड़** के पार पहुंच गया है, जिसे होलसेल वॉल्यूम में बढ़त का सहारा मिला। हालांकि, स्टील और रबर की कीमतों में आग ने कंपनी के मार्जिन को दबा दिया है, जो घटकर **11.4%** रह गए हैं।
Tata Motors ने दूसरी तिमाही में जबरदस्त ग्रोथ दिखाते हुए अपना रेवेन्यू 42% बढ़ाकर ₹23,930 करोड़ दर्ज किया है। इस सफलता के पीछे होलसेल वॉल्यूम का बड़ा हाथ रहा है, जो सालाना आधार पर 43% बढ़कर 135,114 यूनिट्स तक पहुंच गया। विदेशी बाजारों की बात करें तो, मुख्य रूप से इंडोनेशिया से मिले बड़े ऑर्डर के कारण कंपनी का एक्सपोर्ट 177% तक उछल गया। घरेलू बाजार में भी कंपनी ने 36.2% मार्केट शेयर पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है।
मार्जिन पर कच्चे माल की मार
मजबूत सेल्स के बावजूद कंपनी का मुनाफा दबाव में रहा। स्टील और रबर जैसी महत्वपूर्ण सामग्रियों की बढ़ती कीमतों ने बॉटम-लाइन को काफी प्रभावित किया है। मैनेजमेंट के अनुसार, मार्जिन पर पिछले साल के मुकाबले 540 बेसिस पॉइंट की मार पड़ी है, जिसमें से 200 बेसिस पॉइंट की गिरावट सिर्फ पिछले कुछ महीनों में देखी गई। कंपनी ने इस फाइनेंशियल ईयर में 4 बार गाड़ियों के दाम बढ़ाए, लेकिन यह कदम भी बढ़ती इनपुट कॉस्ट की भरपाई करने में नाकाफी साबित हुआ, जिसके चलते EBITDA मार्जिन 94 बेसिस पॉइंट गिरकर 11.4% पर आ गया।
भविष्य की राह और चुनौतियां
निवेशक अब कंपनी के सामने खड़ी चुनौतियों को लेकर सतर्क हैं। Reserve Bank of India द्वारा रेपो रेट 5.50% पर रखे जाने से कमर्शियल वाहनों के लिए फाइनेंसिंग महंगी हो गई है, जिससे आने वाली तिमाहियों में डिमांड पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, Iveco के अधिग्रहण की योजना को लेकर भी मार्केट की नजरें कंपनी के बैलेंस शीट पर हैं कि यह डील कैश फ्लो पर कितना बोझ डालेगी। इन्हीं चिंताओं के कारण सोमवार को कंपनी के शेयर 1% गिरकर बंद हुए। अब बाजार की नजर मैनेजमेंट के कॉस्ट कंट्रोल उपायों और नई विस्तार योजनाओं पर टिकी है।
