Tata Motors ने Q2 FY27 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी घाटे से बाहर निकलकर **₹1,254 करोड़** का नेट प्रॉफिट कमाने में सफल रही है, जिसका बड़ा कारण कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में **42%** की जबरदस्त उछाल है। हालांकि, कच्चे माल की महंगाई ने मार्जिन पर दबाव बनाया है, और अब निवेशक कंपनी के **€3.91 अरब** वाले Iveco ग्रुप अधिग्रहण पर नजरें टिकाए हुए हैं।
Tata Motors ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए ₹1,254 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹867 करोड़ का भारी नुकसान हुआ था, जिससे यह एक बड़ी रिकवरी मानी जा रही है। कंपनी का रेवेन्यू 36% बढ़कर ₹25,338 करोड़ पहुंच गया है, जिसे कमर्शियल व्हीकल्स की भारी डिमांड का सहारा मिला है। इस सेगमेंट में बिक्री 42% बढ़कर 135,114 यूनिट्स रही है।
मार्जिन पर दबाव
अच्छी बिक्री के बावजूद कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिखा है। EBITDA मार्जिन 40 बेसिस पॉइंट्स घटकर 10.9% पर आ गया है। कंपनी प्रबंधन के अनुसार, स्टील और रबर जैसे कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने मुनाफे को प्रभावित किया है। इन खर्चों को कंट्रोल करने के लिए कंपनी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्राइसिंग स्ट्रेटेजी में बदलाव कर रही है।
बड़ा अधिग्रहण (Iveco Deal)
कंपनी अब इटली की कमर्शियल व्हीकल निर्माता कंपनी Iveco ग्रुप को खरीदने के अंतिम चरण में है। यह ऑल-कैश डील लगभग €3.91 अरब की है, जिसके लिए ऑफर प्राइस को बढ़ाकर €14.40 प्रति शेयर किया गया था। टेंडर ऑफर अभी एक्टिव है और इसकी डेडलाइन 26 अक्टूबर, 2026 है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को यह ध्यान देना होगा कि कंपनी के पास वर्तमान में ₹15,900 करोड़ की नेट कैश पोजीशन है, लेकिन अधिग्रहण की राशि इससे काफी अधिक है। इसका मतलब है कि कंपनी इस डील के लिए कैश के साथ-साथ भारी कर्ज (Debt) भी ले सकती है। आने वाले समय में कंपनी की बैलेंस शीट और लेवरेज (Leverage) पर क्या असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
