Tata Motors के पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट ने अक्टूबर 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए **75,426** यूनिट्स की बिक्री की है। इस ग्रोथ के पीछे घरेलू बाजार में **21%** की तेजी और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट में **75%** का बड़ा उछाल है, हालांकि बढ़ती इनपुट कॉस्ट निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सेल्स की रफ्तार और EV का योगदान
कंपनी ने अक्टूबर 2026 में कुल 75,426 गाड़ियों की बिक्री की है, जो पिछले साल के मुकाबले 23% ज्यादा है। इस शानदार प्रदर्शन में घरेलू मांग का बड़ा हाथ रहा, जो 21% बढ़कर 73,894 यूनिट्स तक पहुंच गई। इसके अलावा, एक्सपोर्ट में भी इजाफा देखा गया है, जो बढ़कर 1,532 यूनिट्स हो गया है। सबसे बड़ी हाइलाइट इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेगमेंट रहा, जिसमें 75% की साल-दर-साल वृद्धि के साथ 16,244 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई है, जो भारतीय बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।
मार्जिन पर दबाव का जोखिम
बिक्री के बढ़िया आंकड़ों के बीच, फाइनेंशियल मोर्चे पर कुछ चुनौतियां भी खड़ी हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में कंपनी का कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट का EBITDA मार्जिन 10.9% रहा है। हालांकि वॉल्यूम अच्छा है, लेकिन कच्चे माल जैसे स्टील और रबर की कीमतों में उछाल कंपनी के मार्जिन पर दबाव डाल रहा है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि आने वाली तीसरी तिमाही में इनपुट कॉस्ट के कारण मार्जिन में 150 से 200 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट देखी जा सकती है।
निवेशकों की नजर कहां हो?
कमर्शियल व्हीकल सेक्टर में अब ग्रोथ की रफ्तार धीरे-धीरे स्थिर हो रही है क्योंकि बेस इफ़ेक्ट काफी बड़ा हो गया है। अब कंपनी के लिए वॉल्यूम के साथ-साथ लागत प्रबंधन (cost management) सबसे बड़ी प्राथमिकता है। आगामी 13 नवंबर 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग में पैसेंजर व्हीकल डिवीजन के नतीजों पर चर्चा होगी, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर रहने वाली है कि कंपनी बढ़ती लागत और मुनाफे के बीच तालमेल कैसे बैठाती है।
