इलेक्ट्रिक वाहनों के मार्केट में तेज़ रफ़्तार, नए प्लेयर्स का दबदबा
भारत का इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल (e4W) मार्केट फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) में पिछले साल की तुलना में 88% की रफ्तार से बढ़ा है। इस दौरान कुल 1.91 लाख यूनिट की बिक्री हुई, जो पिछले साल के 1.01 लाख यूनिट से काफी ज़्यादा है। ऑटोमोटिव सेक्टर में यह तेज़ रफ़्तार बड़े बदलाव ला रही है।
मार्केट शेयर में बड़ी उथल-पुथल
Tata Motors, जो अभी भी मार्केट में लीडर है, उसका मार्केट शेयर FY26 में 38.7% पर आ गया, जो एक साल पहले 53.3% था। इस गिरावट की मुख्य वजह बढ़ता कॉम्पिटिशन है। वहीं, Mahindra Electric Automobile एक मज़बूत दावेदार के रूप में उभरा है, जिसका मार्केट शेयर 7.5% से लगभग तीन गुना बढ़कर 20.8% हो गया है। JSW MG Motor का मार्केट शेयर भी कुछ कम हुआ है।
इस कॉम्पिटिटिव माहौल को नए खिलाड़ियों Maruti Suzuki और VinFast ने और भी दिलचस्प बना दिया है। इन्होंने मार्च 2026 तक रजिस्ट्रेशन शुरू किए और तेज़ी से रैंकिंग में चौथे और पांचवें स्थान पर आ गए, जिससे BYD India नीचे खिसक गई। सिर्फ मार्च महीने की बात करें तो Mahindra & Mahindra ने 4,794 EV बेचीं, जिससे वह 25% मार्केट शेयर के साथ दूसरी सबसे बड़ी EV निर्माता बन गई, वहीं JSW MG Motor ने 4,573 यूनिट बेचीं। Tata Motors 7,079 यूनिट बेचकर मार्केट में पहले स्थान पर रही, लेकिन उसका शेयर 36% रहा। यह तेज़ी से बदलता परिदृश्य दिखाता है कि इलेक्ट्रिक चार-पहिया वाहन सेगमेंट कितनी तेज़ी से विकसित हो रहा है। फिलहाल, सभी पैसेंजर व्हीकल्स में EV का पेनिट्रेशन लगभग 3.5% है।
ग्रोथ के मुख्य कारण
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तेज़ ग्रोथ के पीछे कई कारण हैं। Maruti e-Vitara, Mahindra XUV9s, और Tata Punch EV जैसे नए मॉडल्स का लॉन्च, जो पिछले साल उपलब्ध नहीं थे, बिक्री बढ़ाने में अहम साबित हुए हैं। Tata Motors के लिए, नए Sierra.ev को मिली 70,000 से ज़्यादा की बुकिंग्स को एक बड़ा बूस्टर माना जा रहा है। इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, कार निर्माताओं की बढ़ती भागीदारी, और बेहतर रेंज व फीचर्स ने भी ग्राहकों को आकर्षित किया है। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता, जिससे फ्यूल की कीमतों और सप्लाई में अनिश्चितता बढ़ी है, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लंबी अवधि के लिए और आकर्षक बना रही है। सरकारी नीतियां, जैसे PM E-DRIVE स्कीम, भी मार्केट ग्रोथ को सहारा दे रही हैं।
चुनौतियां और बढ़ता कॉम्पिटिशन
मज़बूत ग्रोथ के बावजूद, कुछ चुनौतियां और जोखिम भी सामने आ रहे हैं। Maruti Suzuki, VinFast, और Hyundai जैसे नए प्लेयर्स की एंट्री से मार्केट ज़्यादा क्राउडेड हो गया है। M&M की "Born Electric" स्ट्रैटेजी, जिसमें BE 6 और XUV9e जैसे मॉडल्स शामिल हैं, अच्छे नतीजे दे रही है। S&P Global Mobility के एनालिस्ट्स ने भारत में 2030 तक EV पेनिट्रेशन का अनुमान घटाकर 18.5%-19% कर दिया है, जिसका कारण कुछ क्षेत्रों में धीमी रफ्तार और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इंटरेस्ट रेट्स में कटौती और GST सुधारों से अफोर्डेबिलिटी बढ़ी है, लेकिन बढ़ती इनपुट कॉस्ट और सप्लाई चेन की संभावित बाधाएं मार्जिन और कीमतों पर दबाव डाल सकती हैं। VinFast के मॉडल्स (लगभग ₹16 लाख से शुरू) और BYD के प्रीमियम मॉडल्स (लगभग ₹25 लाख से शुरू) के बीच बड़ा प्राइस गैप मार्केट के सेगमेंटेशन को दर्शाता है और टैरिफ के कारण इंपोर्टेड EV के लिए चुनौतियां खड़ी करता है।
भविष्य का परिदृश्य: और भी कॉम्पिटिटिव मार्केट
मार्केट अब एक लीडर से मल्टी-प्लेयर परिदृश्य की ओर बढ़ रहा है। Tata Motors का EV पोर्टफोलियो अभी भी मज़बूत है, लेकिन मार्केट शेयर में गिरावट दर्शाती है कि लीडरशिप को बढ़ी हुई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। Mahindra & Mahindra, अपनी स्पष्ट EV स्ट्रैटेजी के साथ, मौजूदा लीडर्स को चुनौती देने के लिए अच्छी स्थिति में है। Maruti Suzuki की एंट्री, अपने बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ, EVs को और ज़्यादा सुलभ बनाने और जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। VinFast की तेज़ तरक्की दर्शाती है कि पुराने ब्रांड्स की तुलना में खास तौर पर बने EV प्लेटफॉर्म्स और टेक्नोलॉजी कुछ खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। इंडस्ट्री की ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि ₹12 लाख से कम कीमत वाले मास-मार्केट सेगमेंट में EV को कितना बढ़ावा मिलता है, जो प्रीमियम सेगमेंट से पीछे चल रहा है। बदलते रेगुलेटरी माहौल, जिसमें सब्सिडी का कम होना और नए परफॉरमेंस स्टैंडर्ड्स शामिल हैं, भविष्य के कॉम्पिटिशन को आकार देंगे, और इनोवेशन व कॉस्ट एफिशिएंसी में मज़बूत रहने वाले प्लेयर्स को फायदा पहुंचाएंगे।