ब्रिटेन सरकार चीन से आने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर नए टैरिफ लागू करने पर विचार कर रही है, जिसका सीधा असर Tata Motors की लग्जरी यूनिट JLR पर पड़ सकता है।
ट्रेड वॉर का दबाव
ब्रिटिश सरकार वर्तमान में चीनी इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर नए आयात शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। इस कदम का उद्देश्य ब्रिटेन की व्यापार नीति को यूरोपीय संघ (EU) के साथ जोड़ना है। Tata Motors के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार जैसी है। एक तरफ, ये टैरिफ JLR को स्थानीय बाजारों में सस्ती गाड़ियों से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा से बचा सकते हैं, तो दूसरी तरफ चीन की ओर से संभावित आर्थिक जवाबी कार्रवाई का खतरा भी पैदा हो गया है, जो कंपनी के लिए एक अहम बाजार है।
चीन में JLR के लिए चुनौती
JLR के लिए चीन का बाजार पहले से ही मुश्किलों भरा रहा है। दूसरी तिमाही में वहां रिटेल बिक्री में करीब 7% की गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा, कंपनी ने जून 2026 में ही चीन में अपनी स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बंद कर दिया था। इन चुनौतियों के कारण कंपनी के लिए वहां मुनाफा कमाना और भी कठिन हो गया है।
ग्लोबल सेल्स की तस्वीर
एशिया में सुस्ती के बावजूद, कंपनी का ग्लोबल ऑपरेशन मजबूत दिख रहा है। JLR ने दूसरी तिमाही में 82,400 होलसेल यूनिट्स की बिक्री दर्ज की है, जो सालाना आधार पर 24.5% का उछाल है। इस बढ़त के पीछे मुख्य कारण यूके और उत्तरी अमेरिका के बाजार रहे हैं। अब निवेशकों की नजर 23 अक्टूबर 2026 को होने वाली बोर्ड मीटिंग पर है, जहां दूसरी तिमाही के फाइनेंशियल रिजल्ट्स घोषित किए जाएंगे।
अब बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यूरोप और अमेरिका से मिलने वाला मुनाफा चीन की दिक्कतों की भरपाई कर पाएगा। साथ ही, मैनेजमेंट की तरफ से ट्रेड टैरिफ और चीन को लेकर भविष्य की रणनीति पर दी जाने वाली कमेंट्री बेहद महत्वपूर्ण होगी।
