Tata Motors के लिए आज का दिन बेहद अहम है। कंपनी के **€3.91 बिलियन** के Iveco अधिग्रहण सौदे की समयसीमा आज खत्म हो रही है। अब तक सिर्फ **35%** शेयरहोल्डर्स ने ही प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जबकि डील के लिए **80%** टारगेट हासिल करना जरूरी है।
वैल्यूएशन और राजनीतिक दबाव का संकट
इस अधिग्रहण की राह में बड़ी बाधाएं खड़ी हैं। एक्टिविस्ट इन्वेस्टर Petrus Advisers ने €14.40 प्रति शेयर की बिड को काफी कम बताया है और इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि सही वैल्यूएशन €18 प्रति शेयर के करीब होनी चाहिए। इसके अलावा, इटली सरकार भी दबाव बना रही है। वहां के इंडस्ट्री मिनिस्टर Adolfo Urso ने साफ कर दिया है कि वे इटली में नौकरियों और इंडस्ट्रियल ऑपरेशन्स को लेकर ठोस गारंटी चाहते हैं।
फाइनेंशियल और स्ट्रैटेजिक इम्पैक्ट
अगर यह सौदा सफल होता है, तो एक नई ग्लोबल कमर्शियल व्हीकल कंपनी बनेगी, जिसका सालाना रेवेन्यू €21 बिलियन के पार पहुंच सकता है। Tata Motors अपनी भारतीय बाजार की पकड़ को यूरोप में विस्तार देने की कोशिश कर रही है। हालांकि, एक्सपर्ट्स को चिंता है कि यूरोप में कमजोर मांग और भारी इंटीग्रेशन कॉस्ट कंपनी के बैलेंस शीट पर दबाव डाल सकती है। इतिहास गवाह है कि कंपनी ने पहले भी Jaguar Land Rover के अधिग्रहण के दौरान चुनौतीपूर्ण दौर देखा था, जो बाद में विकास का जरिया बना।
मार्केट की नजरें अब 30 अक्टूबर की सेटलमेंट डेट पर टिकी हैं। फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और देखना यह है कि क्या कंपनी आखिरी पलों में जरूरी सपोर्ट जुटा पाती है या यह डील वैल्यूएशन और रेगुलेटरी विवादों के बीच दम तोड़ देगी।
