Tata Motors के कमर्शियल व्हीकल (CV) डिविजन ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में जबरदस्त परफॉरमेंस दिखाई है। 'टू-स्पीड' रिकवरी के चलते, खासकर दूसरी छमाही में आए उछाल की बदौलत, कुल CV बिक्री 14% बढ़कर 4,28,329 यूनिट्स तक पहुंच गई। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि फ्रेट एक्टिविटी में तेजी, फ्लीट यूटिलाइजेशन रेट्स का सुधरना और कस्टमर्स द्वारा पुराने व्हीकल्स को बदलने में की गई देरी इस मजबूत परफॉरमेंस के मुख्य कारण रहे।
Tata Motors के कमर्शियल व्हीकल बिजनेस के मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव, Girish Wagh ने बताया कि दूसरी छमाही में मांग की स्थितियों में सुधार के साथ एक निर्णायक रिकवरी देखी गई। मीडियम और हेवी कमर्शियल व्हीकल्स (MH&ICVs) सेगमेंट में बिक्री 13% बढ़कर 1,20,056 यूनिट्स रही, जिसमें चौथी तिमाही में 29% की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की गई। इससे पता चलता है कि अब लॉन्ग-हॉल सेगमेंट्स में फिर से डिमांड बढ़ी है। स्मॉल कमर्शियल व्हीकल्स (SCVs) में सालाना 8% की ग्रोथ रही, जबकि चौथी तिमाही में 25% का इजाफा हुआ, जो स्थिरीकरण का संकेत देता है। पैसेंजर कैरियर्स में भी 9% की ग्रोथ देखने को मिली।
Tata Motors का इंटरनेशनल बिजनेस ग्रोथ का एक बड़ा इंजन बनकर उभरा है, जहां वॉल्यूम 54% बढ़कर 28,216 यूनिट्स हो गया। अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया जैसे रीजन्स में इस विस्तार से डोमेस्टिक मार्केट की साइक्लिकलिटी के खिलाफ एक मजबूत हैज (hedge) मिल रहा है। हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि रिकवरी का एक बड़ा हिस्सा दूसरी छमाही में केंद्रित रहा। कंपनी ने वेस्ट एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव को एक उभरते हुए जोखिम के रूप में चिन्हित किया है। Mr. Wagh ने इस बात पर जोर दिया कि डीजल की कीमतें एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेंगी, जिसका फ्लीट ऑपरेटर्स की टोटल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप पर सीधा असर पड़ता है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) वॉल्यूम में 59% की जोरदार ग्रोथ देखी गई, हालांकि यह शुरुआत में कम बेस से हुई।
आगे चलकर, इंडस्ट्री एग्जीक्यूटिव्स का अनुमान है कि FY27 में बाजार की चाल थोड़ी असमान रह सकती है, जहां फ्यूल कॉस्ट्स और भू-राजनीतिक डेवलपमेंट जैसे बाहरी कारक मार्केट सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकते हैं।