Tata Motors ने इटली की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी Iveco Group का अधिग्रहण कर लिया है। कंपनी ने **€14.4** प्रति शेयर के भाव पर **89.42%** हिस्सेदारी खरीदी है, जिससे Tata Motors को यूरोप में बड़ा विस्तार और नई टेक्नोलॉजी मिलने की उम्मीद है।
Tata Motors ने अपने सब्सिडियरी TML CV Holdings BV के जरिए इटली की Iveco Group में 89.42% हिस्सेदारी खरीदकर अपना ग्लोबल फुटप्रिंट मजबूत कर लिया है। यह एक ऑल-कैश डील है, जिसमें 23.8 करोड़ कॉमन शेयर्स को €14.4 प्रति शेयर के भाव पर खरीदा गया है। इस अधिग्रहण के साथ ही कंपनी को यूरोप में 16 इंडस्ट्रियल साइट्स और 22 रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर्स का एक्सेस मिल गया है। साल 2025 में Iveco का रेवेन्यू €13.43 बिलियन रहा था, जो Tata Motors के कमर्शियल व्हीकल और पावरट्रेन पोर्टफोलियो को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
ग्लोबल विस्तार और टेक्नोलॉजी
इस डील का मुख्य उद्देश्य दोनों कंपनियों की ताकत को मिलाना है। चूंकि दोनों के बाजारों में ओवरलैप बहुत कम है, इसलिए Tata Motors को यूरोप में अपनी पैठ जमाने में बड़ी मदद मिलेगी। खासतौर पर Iveco के FPT पावरट्रेन डिवीजन के आने से Tata Motors की R&D क्षमता में भारी इजाफा होगा। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनी कैसे इन अलग-अलग बिजनेस मॉडल्स को जोड़कर प्रॉफिटेबिलिटी बढ़ाती है।
मैनेजमेंट और बोर्ड की नई रूपरेखा
इस डील के रणनीतिक महत्व को समझते हुए Tata Sons के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को Iveco का बोर्ड चेयरपर्सन बनाया गया है। बोर्ड में पी.बी. बालाजी और गिरीश वाघ भी शामिल हुए हैं। कंपनी की स्थिरता बनाए रखने के लिए CEO ओलोफ पेर्सन अपने पद पर बने रहेंगे, साथ ही नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को भी जगह दी गई है।
रिस्क और चुनौतियां
इतने बड़े लेवल पर इंटरनेशनल अधिग्रहण में सांस्कृतिक तालमेल, रेगुलेटरी अनुपालन और मैनेजमेंट स्टाइल जैसे रिस्क हमेशा बने रहते हैं। यूरोप में बढ़ती एनर्जी कॉस्ट और सख्त एमिशन नॉर्म्स भी मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं। चूंकि यह एक ऑल-कैश डील है, इसलिए मार्केट कंपनी के कैश फ्लो और लिक्विडिटी पर बारीक नजर रखे हुए है। माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स के लिए टेंडर ऑफर 6 नवंबर तक खुला है, जिसके बाद कंपनी पूरी तरह से मालिकाना हक हासिल करने के लिए आगे बढ़ सकती है।
