साल के अंत में सेल्स बढ़ाने की होड़
ऑटोमोबाइल कंपनियां Tata Motors और Mahindra & Mahindra इस मार्च में इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की बिक्री बढ़ाने के लिए आक्रामक डिस्काउंट स्ट्रैटेजी अपना रही हैं। कुछ चुनिंदा EV मॉडलों और वेरिएंट्स पर ₹3.8 लाख तक के इंसेंटिव दिए जा रहे हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि यह कदम फाइनेंशियल ईयर खत्म होने से पहले डिलीवरी तेज करने और महंगे वेरिएंट्स को ग्राहकों के लिए ज्यादा आकर्षक बनाने के मकसद से उठाया गया है।
डिस्काउंट का गणित
यह बड़ी प्राइस रिडक्शन (price reduction) मुख्य रूप से टॉप-एंड वेरिएंट्स पर केंद्रित है, जिनकी कीमत वैसे ही ज्यादा होती है। S&P Global Mobility के डायरेक्टर Puneet Gupta ने कहा कि 'इन प्रीमियम ट्रिम्स की बिक्री बढ़ाने के लिए कुछ प्राइस करेक्शन (price correction) जरूरी था'। Tata Motors जहां कैश बेनिफिट्स, एक्सचेंज/स्क्रैपेज बोनस और लॉयल्टी इंसेंटिव का कॉम्बो दे रही है, वहीं Mahindra & Mahindra 'स्पेशल मार्च' बेनिफिट्स के साथ कॉर्पोरेट और एक्सचेंज ऑफर पेश कर रही है। हालांकि, एंट्री-लेवल ट्रिम्स पर इंसेंटिव काफी कम हैं, जो आमतौर पर ₹50,000 के आसपास हैं।
प्रतिस्पर्धा और स्केल
यह आक्रामक इंसेंटिव्स का खेल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि Tata और Mahindra दोनों ही तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में बड़ा स्केल (scale) हासिल करना चाहते हैं। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में Tata Motors ने 70,946 EVs की बिक्री के साथ बाजार में अपनी बढ़त बनाए रखी है, जिसके बाद JSW MG Motor का नंबर आता है। Mahindra ने भी इस सेगमेंट में ज़बरदस्त तरक्की की है, FY26 में अब तक 35,717 EVs बेचकर पिछले साल की तुलना में चार गुना का उछाल दर्ज किया है। इन सबके बावजूद, देश में कुल कार बिक्री में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की हिस्सेदारी अभी भी मात्र 3.5% है।
बाजार के संकेत
जहां इंडस्ट्री के एक धड़े का मानना है कि ये डिस्काउंट्स 31 मार्च तक डीलर इन्वेंट्री को खाली करने का एक रूटीन ईयर-एंड प्रैक्टिस है, वहीं दूसरे इसे संभावित रूप से कमजोर पड़ती डिमांड का संकेत मान रहे हैं। इतने बड़े इंसेंटिव्स यह दिखाते हैं कि ऑटोमेकर्स शायद बढ़ती प्रतिस्पर्धा वाले माहौल में अपनी शुरुआती सेल्स की रफ्तार बनाए रखने में चुनौती महसूस कर रहे हैं, और फिलहाल डिमांड को बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयास कर रहे हैं।