Tata Group की सब्सिडियरी Agratas Energy Storage Solutions ने AESC Apollo Holding के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर एग्रीमेंट किया है। इस साझेदारी से भारत और यूके में गिगाफैक्ट्री बनाने की तैयारी है, हालांकि यूके प्रोजेक्ट में देरी और कर्ज का दबाव बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
Tata Group की बैटरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, Agratas Energy Storage Solutions ने चीन के Envision Group की सब्सिडियरी AESC Apollo Holding के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इस डील के जरिए Agratas को लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) और निकेल मैंगनीज कोबाल्ट (NMC) बैटरी बनाने की तकनीक मिलेगी। ये दोनों तकनीकें इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) की रेंज, सुरक्षा और लागत तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
इस पार्टनरशिप को मजबूत करने के लिए AESC ने Agratas में 12% की हिस्सेदारी भी ली है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और यूके में निर्माणाधीन गिगाफैक्ट्री के काम में तेजी लाना है।
कंस्ट्रक्शन और एग्जीक्यूशन की चुनौतियां
यूके के समरसेट में बन रही Agratas की फैसिलिटी Jaguar Land Rover (JLR) के लिए बैटरी सप्लाई करेगी। हालांकि, कॉन्ट्रैक्टर बदलने और लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण प्रोजेक्ट में देरी हुई है। अब प्रोडक्शन 2026 की जगह 2027 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। कंपनी ने अपने ऑपरेशंस के लिए £1.15 बिलियन (करीब 11,500 करोड़ रुपये से ज्यादा) से अधिक का कर्ज लिया है, जिसे चुकाने के लिए समय पर प्रोडक्शन शुरू होना बहुत जरूरी है।
जियोपॉलिटिकल और टेक्निकल रिस्क
EV बैटरी सेक्टर में चीन से जुड़ी कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी शेयरिंग पर भारत सरकार की काफी नजर रहती है। हालांकि Agratas इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ट्रांसफर मॉडल पर काम कर रही है, लेकिन रेगुलेटरी माहौल और जियोपॉलिटिकल तनाव भविष्य में मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। फिलहाल मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी कितनी जल्दी डेवलपमेंट स्टेज से निकलकर बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन शुरू कर पाती है।
