टाटा ग्रुप की बैटरी कंपनी Agratas Energy Storage Solutions के बोर्ड से चीनी पार्टनर AESC Apollo के प्रतिनिधि Gordon Louis Chin ने इस्तीफा दे दिया है। कंपनी अब अपनी मैन्युफैक्चरिंग और R&D को इन-हाउस करने की रणनीतिक दिशा में आगे बढ़ रही है।
टाटा ग्रुप के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इकोसिस्टम के लिए अहम मानी जाने वाली कंपनी Agratas Energy Storage Solutions में बड़ा बदलाव हुआ है। चीनी कंपनी AESC Apollo का प्रतिनिधित्व करने वाले Gordon Louis Chin ने कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब टाटा समूह अपनी बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च प्रक्रियाओं को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दे रहा है।
बड़े प्रोजेक्ट्स और टारगेट
कंपनी फिलहाल गुजरात के साणंद में 20 GWh और यूके के समरसेट में 40 GWh के विशाल बैटरी प्लांट विकसित कर रही है। ये प्रोजेक्ट्स टाटा ग्रुप के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कंपनी को Jaguar Land Rover (JLR) के साथ $530 मिलियन (करीब ₹5,000 करोड़) का 7 साल का बैटरी सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट पूरा करना है, जो इसी फाइनेंशियल ईयर से शुरू होने वाला है।
इन-हाउस तकनीक पर दांव
बाहरी पार्टनर्स पर निर्भरता कम करने के लिए Agratas ने टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ा दिया है। कंपनी का R&D खर्च पिछले साल के £7.7 मिलियन से बढ़कर FY26 में £20.9 मिलियन के स्तर पर पहुंच गया है। कंपनी अब NMC (निकल मैंगनीज कोबाल्ट) और LFP (लिथियम फेरस फॉस्फेट) बैटरी तकनीक में महारत हासिल करने पर काम कर रही है।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि, कंपनी के सामने एग्जीक्यूशन की चुनौतियां भी हैं। यूके के समरसेट प्लांट में निर्माण ठेकेदारों में बदलाव और बजट का दबाव जैसे मुद्दे सामने आए हैं। साथ ही, चीन द्वारा बैटरी टेक्नोलॉजी पर कड़े एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाए जाने के बाद, टाटा के लिए अपनी इन-हाउस तकनीक विकसित करना प्रोडक्शन टाइमलाइन बनाए रखने के लिए अनिवार्य हो गया है। निवेशकों की नजर अब गुजरात और समरसेट प्लांट के कमीशनिंग स्टेटस पर टिकी है, जो ग्रुप की लॉन्ग-टर्म प्रॉफिटेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।
