तमिलनाडु में ऑटो रिटेल सेल्स सितंबर 2026 में **2.25 लाख** यूनिट्स तक पहुंच गई है, जो सालाना आधार पर **46%** की शानदार बढ़त है। हालांकि, डीलर एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि हाई स्टॉक लेवल और पिछले साल के 'लो बेस' के कारण स्थिति उतनी आसान नहीं है जितनी दिख रही है।
सितंबर 2026 में तमिलनाडु के ऑटो बाजार में वाहनों के रजिस्ट्रेशन में जोरदार तेजी दिखी है। आंकड़ों के अनुसार, रिटेल सेल्स 2.25 लाख यूनिट्स रही, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 46% ज्यादा है। यह ग्रोथ टू-व्हीलर, पैसेंजर कार और कमर्शियल व्हीकल तीनों सेगमेंट में दर्ज की गई है।
असली पेच कहां फंसा है?
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, इस ग्रोथ के पीछे 'लो बेस इफेक्ट' (Low Base Effect) का बड़ा हाथ है। सितंबर 2025 में सेल्स का आंकड़ा कम था, जिसकी वजह से इस साल की बढ़ोतरी तुलनात्मक रूप से ज्यादा नजर आ रही है। यानी, बाजार में असली डिमांड उस स्तर पर नहीं है जैसा कि ये 46% का आंकड़ा दर्शाता है।
इन्वेंट्री का दबाव
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता पैसेंजर व्हीकल्स की इन्वेंट्री है। डीलर्स के पास स्टॉक 43 से 45 दिनों तक पहुंच गया है, जबकि इंडस्ट्री का बेंचमार्क केवल 21 दिन होता है। जब गाड़ियां शोरूम के बजाय स्टॉकयार्ड में खड़ी रहती हैं, तो कंपनियों को मार्जिन बचाने के लिए भारी डिस्काउंट देना पड़ता है, जिससे मुनाफा प्रभावित हो सकता है।
नेशनल लेवल पर क्या स्थिति है?
पूरे भारत में ऑटो रिटेल सेल्स 25.37 लाख यूनिट्स के रिकॉर्ड स्तर पर रही, जिसमें 31.82% का उछाल आया है। फिलहाल ऑटो कंपनियां रूरल डिमांड में सुस्ती और इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं। आने वाले फेस्टिवल सीजन में कंपनियां किस तरह इस इन्वेंट्री को क्लियर करती हैं, यह उनके फाइनेंशियल हेल्थ के लिए सबसे बड़ा टेस्ट होगा।
